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खास  आदमी  जीने  के, मौके करे तलाश 

आम आदमी अपनी ही, ढोते फिरता लाश!!!
--
मन पांखी  उड़ता रहे,चाहे गगन विशाल।
देखे तन का घोसला ,देता खुद को डाल ।।
--
सोचे है कुछ आदमी ,होती है कुछ बात!
होना होनी के लिये ,करना अपने हाथ।।
--
अलग अलग है बानगी ,अलग अलग है रंग।
जारी  है हर मोड़ पे, इस  जीवन  की  जंग।।
--
आँखों में जब अश्क का,दरिया सा लहराय ।
दर्द-सिन्धू में जानिए , मन का मीत नहाय ।
------------------
अविनाश बागडे 

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Comment by Dr.Ajay Khare on December 28, 2012 at 12:14pm

bagde ji jeevan ki sachhai ka sunder bayan badahi

Comment by अमि तेष on December 26, 2012 at 11:38pm

वाह 

Comment by seema agrawal on December 26, 2012 at 8:21pm

होना होनी के लिये ,करना अपने हाथ...वाह बहुत बढ़िया बात अविनाश जी 

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 26, 2012 at 6:26pm
आँखों में जब अश्क का,दरिया सा लहराय ।
दर्द-सिन्धू में जानिए , मन का मीत नहाय 
 
सुन्दर दोहे आदरणीय अविनाश जी सादर बधाई स्वीकारें.
Comment by MAHIMA SHREE on December 26, 2012 at 5:49pm

अलग अलग है बानगी ,अलग अलग है रंग।
जारी है हर मोड़ पे, इस जीवन की जंग।।आदरणीय अविनाश सर नमस्कार .. बहुत बढिया !!!.इन उधृत पंक्तियों पर बधाई स्वीकार करें

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 26, 2012 at 4:10pm

अलग अलग है बानगी ,अलग अलग है रंग।

जारी  है हर मोड़ पे, इस  जीवन  की  जंग।।
आदरणीय अविनाश जी, 
सादर 
सहमत 
Comment by अरुन 'अनन्त' on December 26, 2012 at 1:51pm

आदरणीय सर बेहद सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति है खास और आम आदमी के बीच का अंतर सिखलाती सुन्दर पंक्तियाँ बधाई स्वीकारें .

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 26, 2012 at 12:50pm
आँखों में जब अश्क का,दरिया सा लहराय ।
दर्द-सिन्धू में जानिए , मन का मीत नहाय ।
-बहुत सुन्द्दर बधाई श्री अविनाश बागडे जी 

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 26, 2012 at 10:58am

अलग अलग है बानगी ,अलग अलग है रंग।

जारी  है हर मोड़ पे, इस  जीवन  की  जंग।।----बहुत सुन्दर सार्थक लिखा प्राची जी की तरह मैं भी कहूँगी इन्हें दोहों में बाँध कर देखो और निखर जायेंगी बहुत बधाई अविनाश जी 
--

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 26, 2012 at 10:52am

सुन्दर द्विपदियाँ आ.अविनाश जी,

शिल्प पर थोडा सा समय दे कर इन्हें दोहों की तरह साध सकते हैं.

सादर.

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