For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चारों तरफ अगर रौशनी का जाल फैला हो मगर इंसान के मन में अँधेरा हो तो शायद एक कदम भी ठीक से नहीं रख सकता. अपनी उलझनों में डूबता उतराता मनुष्य संयम भी खो देता है और परेशानियों के सागर के तल में खुद को खोने लगता है.
ये धर्म गुरु भी ना बस प्रवचन करना जानते हैं और कुछ नहीं , कोई चढ़ावे ना चढ़ाए तब देखो कैसा ज्ञान देते हैं ये हमको,. पेट भरा हो तो सब अच्छी अच्छी बातें करते हैं मगर ये प्रवचन किसी का पेट तो नहीं भर सकते. पिताजी का ब्यापार ठीक से चल नहीं रहा है और उसका  पढ़ाई में बिलकुल मन नहीं लग रहा है. लगेगा भी कैसे - बस खाना खाओ , पढो और सो जाओ, औरो की तरह जीवन में अलग सा कुछ भी नहीं . सभी कॉलेज की तरफ से घूमने गए , उसके लिए २ हजार भी नहीं थे घर में की वो भी अपने दोस्तों के साथ घूमने जा सकता था. बस एक ही बात अभी समय ठीक नहीं है, बिज़नस ठीक से नहीं चल रहा है, बाद में चले जाना.,,

कॉलेज में स्पोर्ट्स की वजह से छुट्टी थी, माँ ने पिताजी का टिफ़िन तैयार किया और सुदीप को कहा जाकर दूकान पर देकर आ जाओ. सुदीप ने नाक भौं सिकोड़ी मगर जाना ही पड़ेगा . दूकान पर पहुचते ही पिताजी को टिफ़िन देकर बाहर जाने लगा की पिताजी ने रोक लिया -अरे सुदीप आज तुम यहाँ आ गए हो तो एक काम कर दो, ये पेमेंट देने जाना था -सुरेश आज छुट्टी पर है तुम ये पैसे "पॉवर पैक" में देकर  आ जाओ , सुदीप ने पैसे का लिफाफा और पता लिया निकल पडा - पॉवर पैक फैक्ट्री जादा दूर नहीं थी,,,जैसे ही सुदीप   गेट-कीपर को अपना नाम लिखाकर अन्दर जाने ही वाला था सामने से उसका क्लास मेट अर्जुन कार में आ रहा था,,,सुदीप उसे देख कर चौंक गया, कॉलेज में तो बहुत ही साधारण तरीके से आता है , अभी इतनी लम्बी कार में,,,अर्जुन सुदीप को देखते ही रुक गया,,,सुदीप ने पुछा तुम यहाँ ? अर्जुन ने हँसते हुए कहा हाँ ये मेरी फैक्ट्री है - दादा जी और पापा बैठते हैं मैं तो कभी कभी खाली समय में आ जाता हूँ, कॉलेज ख़तम होने के बाद बैठूगा. आखिर अभी से ध्यान नहीं दूंगा तो काम कैसे सीख पाऊँगा..और उसे साथ लेकर अन्दर चला गया, अपने दादा जी और पापा से सुदीप का परिचय कराया. दोनों ने ही सुदीप को प्यार से बैठाया, और उसके पिता की बहुत तारीफ़ की, बहुत ही इमानदार और मेहनती इंसान हैं तुम्हरे पिता , सुदीप अब पढ़ाई के बाद तुम्हें उनके स्वास्थय को ध्यान में  रखकर काम में हाथ बंटाना चाहिए, मगर सुदीप के सपने तो बहुत ऊंचे थे, वो तो बाहर पढाई के सपने देख रहा था,  खैर पेमेंट देकर अर्जुन के साथ बाहर आ गया , अर्जुन ने कार से उसे उसके घर छोड़ दिया, सुदीप सोच रहा था क्या मजे हैं इनके, इतनी बड़ी फैक्ट्री , लम्बी सी गाडी, आलिशान बँगला, और हम एक पुराने से घर में रहते हैं , छोटी सी कोठरीनुमा दुकान ,,,कहाँ ये लोग कहाँ हम लोग,,एक दो दिन में पिताजी से बात करूंगा . 

और आज रविवार समय मिल ही गया , जैसे ही पिताजी चाय पीकर , न्यूज़ पेपर लेकर आराम चेयर पर  बैठे और सुदीप को चश्मा लाने के लिए कहा...सुदीप अपने लिए चेयर लेकर पिताजी के सामने बैठ गया,,,और चश्मा खुद ही पिताजी को पहना कर कहने लगा पापा आप से एक बात कहनी है ,,,,हाँ हां कहो - तुम कुछ कभी कहते ही नहीं,,,पढाई तो ठीक चल रही है ना, बेटा अभी बाजार से माल नहीं खरीद पा रहा हूँ ,तुम्हारी  बहन की शादी के बाद हाथ थोडा तंग हो गया है इसीलिए तुम्हें पैसे नहीं दे पाया था...अच्छा हाँ बोलो क्या कह रहे थे....

सुदीप ने लम्बी सांस भरी और कहा पापा आपने मुझे जहां पेमेंट के लिए भेजा था वो मेरे दोस्त की फैक्ट्री है , वो लोग इतने धनाढ्य है और हमारे पास कुछ नहीं हम कब तक ऐसी हालत में रहेंगे,,,अगर नहीं चलता है तो ये बिज़नस बदल दीजिये....पिताजी ने हँसते हुए कहा ,,,अब तुमने बात छेड़ ही दी है तो सुनो...इंसान को अपने लक्छ्य से डिगना नहीं चाहिए...एक उदाहरण के तौर पर ,,,जब घर में लाइट चली जाती है इंसान अँधेरे में ही रखी मोमबत्ती और माचिस ढूढ़ लेता है क्योंकि उसे दिशा पता है अपने घर के हर कोने में क्या रखा है - मगर दूसरी जगह वह अँधेरा क्या प्रकाश में भी नहीं ढूढ़ पाता है क्योंकि उसे ठीक से पता नहीं होता क्या करना है ...और जिनके यहाँ तुम गए थे उसके पिताजी श्री अनुपम (अर्जुन के दादाजी) पहले हमारी कंपनी से माल खरीदते थे जब  मैं एक कंपनी में मेनेजर था, जब वो हमारे पास आते थे तब चाय भी नहीं पीते थे, एक दिन मैंने उनसे पूछा अनुपम जी आप चाय क्यों नहीं पीते हैं तब अनुपम जी ने कहा -भाई मेरा छोटा सा काम, जब मेरे यहाँ लोग आते हैं मैं उन्हें चाय नहीं पिला पाता हूँ क्योंकि जितनी कमाई होती है उससे घर खर्च ही मुश्किल से चलता है , तो मैं कैसे खुद का सत्कार लूं. छोटे छोटे खर्चों में कटौती कर के ही लक्षय की प्राप्ति करनी है,,, वो दिन और आज का दिन क्या नहीं है उनके पास , उनके बेटे ने उनके साथ पूरा सहयोग करके इतनी बड़ी फैक्ट्री बनायी,कहकर पिताजी कुछ सोचने लगे , मगर सुदीप ,,,,सुदीप के मन में भविष्य का सूरज उद्दीप्त्मान होने लगा था,,,नयी प्रेरणा , नयी ऊर्जा ,,,,और उसके पिता जी का लक्षय जो अब उसका अपना लक्षय था,,,,बस कुछ समय और फिर वो भी उन्हीं ऊंचाइयों को छुएगा,,,येही है सच्ची मन की रोशनी,,,,

Views: 488

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 25, 2012 at 7:21pm

बहुत सुन्दर प्रेरणादायक कहानी सुमन जी बधाई स्वीकारें.

Comment by vijay nikore on December 18, 2012 at 3:47pm

आदरणीया सुमन जी,

आपकी यह प्ररणास्पद कहानी अच्छी लगी । सभी के लिए अच्छा संदेश है इसमें।

साधुवाद !

विजय निकोर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
16 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
18 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
19 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
22 hours ago
Admin replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"लगभग 90 हजार प्रति वर्ष"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर नमस्कार और आदाब सम्मानित मंच। ओबीओ के वाट्सएप समूह से इस दुखद सूचना और यथोचित चर्चा की जानकारी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय, ओ.बी.ओ. को बंद करने का निर्णय दुखद होने के साथ साथ संचालक मण्डल की मानसिक पराजय, थकान आदि…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"नीचे आए हुए संदेशों से यह स्पष्ट है कि अब भी कुछ लोग हैं जो जलते शहर को बचाने के लिए पानी आँख में…"
Monday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय जी  ओबीओ को बन्द करने की सूचना बहुत दुखद है । बहुत लम्बे समय से इसके साथ जुड़ा हूँ कुछ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओबीओ से पिछले बारह साल से जुड़ी हूँ। इसके बंद हो जाने की बात से मन भारी हो रहा है।मेरे कच्चे-पक्के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service