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चलो जी चलो कलम उठाएं.चलो जी चलो कलम उठाएं.

चलो  जी चलो कलम उठाएं;चलो  जी चलो कलम उठाएं.
लिख के कविता लेख कहानी,हम लेखक बन जाएं
तदुपरांत वो बकरा ढूंढें जिसको लिखा सुनाएं
चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.
-०-०-०--०-०-०-०-०-०-०-०-
कागज़ कलम ; डाक खर्चे की ;पहले युक्ति लगाएं,
लिख लिख रचनाएँ अपनी ;अख़बारों को भिजवाएं .
खेद सहित लौटी रचनाएँ अपने दुखड़े सुनाएं
उन रचनाओं को फिर डाक से  और जगह भिजवाएं
चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.

मनवा सोचे चलो किसी भी सहित्य सभा में जाएं  ;
अपने मिलें बिरादरी वाले ,सुन  लें और सुनाएं;
उठा पटक साहित्य सभा की जब मंचित हो जाएं
लौट ओ बुधु चलो तो घर को ,मनुआ जी अकुलाएं.
चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.

जस तस कर के छपने लागें;तब तृष्णा बढ़ जाएं ;
अब पुस्तक छपवाने को लो लेखक मन अकुलाएं .
प्रकाशक पूँजी मांगे और तिस पर भी इतराएँ .
"दो शब्द" लिखवाने को फिर लेखक दर  दर जाएं
चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.

"दीप" की पुस्तक के बारे में दो शब्द लिख डाले ;
"अहसानों के गठर" लिख ते ही दीप -सर डाले
निज पुस्तक पे उस के एवज गोष्ठी खट से मांगी ;
साहित्य सभा की  गोष्टी पर लो  दीप जी  जेब कटाएँ
चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.
दीप जीर्वी

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Comment by Yogi Saraswat on July 4, 2012 at 12:39pm

जस तस कर के छपने लागें;तब तृष्णा बढ़ जाएं ;
अब पुस्तक छपवाने को लो लेखक मन अकुलाएं .
प्रकाशक पूँजी मांगे और तिस पर भी इतराएँ .
"दो शब्द" लिखवाने को फिर लेखक दर  दर जाएं
चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.

आपने लेखक की मन की पीड़ा और उसके दर्द के साथ साथ उसके उमंगों को केनवास दे दिया , बहुत बढ़िया ज़िर्वी साब !

Comment by Rekha Joshi on July 3, 2012 at 6:29pm

आदरणीय दीप जी ,बढ़िया प्रस्तुतिपर आपको बहुत बहुत बधाई 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 2, 2012 at 11:09pm

कागज़ कलम ; डाक खर्चे की ;पहले युक्ति लगाएं,
लिख लिख रचनाएँ अपनी ;अख़बारों को भिजवाएं .
खेद सहित लौटी रचनाएँ अपने दुखड़े सुनाएं 
उन रचनाओं को फिर डाक से  और जगह भिजवाएं 
चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.

इस कवि लेखक वर्ग की पीड़ा को व्यक्त करती और सटीक हालात को  व्यक्त करती रचना ..ये तो हम सब कहीं न कहीं भोग चुके हैं भोग रहे हैं ...काश कलम को भी सम्मान मिले ..अब हर क्षेत्र में सामजिक सुरक्षा की पहल हो रही है फिर इस क्षेत्र को नजर अंदाज क्यों ???...बहुत प्यारी रचना ..जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 2, 2012 at 9:15pm

रचना की प्रस्तुति के लिये साधुवाद.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 2, 2012 at 8:21pm

अच्छी रोचक रचना है साहित्य कारों को कैसे कैसे पापड बेलने पड़ते हैं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 2, 2012 at 3:57pm
साहित्यकार के मार्ग में आने वाले हर स्पीड ब्रेकर को इस खूबसूरत रचना के माध्यम से सबके साथ साँझा करने हेतु आपका आभार आ. दीप ज़िरवी जी. 

कृपया ध्यान दे...

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