For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

DEEP ZIRVI's Blog (45)

अगर किसी को न भाई हो

कुछ हल्का-फुल्का

इश्क-विश्क का फंडा ,यारा टेंशन वेंशन भूल .

और झमेले लाखों यारा ,रख अपने को cool .

'हिंदी वाले 'फूल' से चेहरे ,दिल्फैंकों को अक्सर .

मान के चलते सोच के चलते , इंग्लिश वाले 'fool '

कलयुग आया ,लड़का लडकी प्रेमिका प्रेमी कम हैं ;

इक दूजे को use ये करते समझ समझ के tool .

खूब निभे गी यारी यारा मेरी तेरी सब की ;

खुद की ego मार दबा दे ,दे न खुद को तूल.

आप को जो इक लाफा…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on August 3, 2012 at 2:30pm — 1 Comment

राखी .

मानो तो रूह क़ा नाता है जी ये राखी

न मानो कच्चा धागा है जी ये राखी .

 

जो राखी को दम्भ-आडम्बर मानते हैं ;

उन का मन भी तो अपनाता है ये राखी .

 

बहना के मन से उपजी हर इक दुआ है ये ;

भाई-बहन से बंधवाता है ये राखी .

 

सभ्य समाज की नींव के पत्थर नातों…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on July 27, 2012 at 7:00pm — 1 Comment

रिश्ते...

उगते रिश्ते ,ढलते रिश्ते ;

रुकते रिश्ते चलते रिश्ते .

मन के रिश्ते मन से रिश्ते

तन के रिश्ते तन से रिश्ते

अपने रिश्ते बनते रिश्ते

सपने रिश्ते तनते रिश्ते .

उसके रिश्ते इसके रिश्ते

रिसते रिश्ते ,घिसते रिश्ते .

शासक रिश्ते शासित रिश्ते ,

बेदम रिश्ते ,बा-दम रिश्ते .

रिश्ते नीरज ,नीरस रिश्ते

रिश्ते सुधा कहीं गरल रिश्ते .

आंगन रिश्ते उपवन रिश्ते ,

हैं धरा जलद गगन रिश्ते .

रिश्ते पूनम क़ा चाँद भी हैं ,

तारे नयनाभिराम भी…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on July 24, 2012 at 6:30am — 2 Comments

भूखे को तो चंदा में रोटी दीखे;

रोती रोटी  क्यों रो रही ,कर लो बात ,

रोटी रोटी क्यों हो रही ,कर लो बात;'



तरकारी के भाव चले विन्ध्याचल को

तन्हा रोटी यों रो रही ,कर लो बात .



धान ज्वारी मक्का बासमती पेटेंट ;

नयनन जल रोटी ले रो रही कर लो बात.



भूखे को तो चंदा में रोटी दीखे;

चंदा रोटी एक हो रही ? कर लो बात .



रात को खा के सोए सुबह पेट ;

रोटी रोटी देख हो रही कर लो बात .



तीरों तलवारों से न टूटे छल बल से ;

टूटे भूखे पेट वो…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on July 17, 2012 at 5:30pm — 1 Comment

हास्य कविता

अंधी पीसे कुत्ता खाए, खाने दो .
मत भेजे पे बोझा भेजो जाने दो .

बेईमान का भाव करोड़ों में , देखो .
और ईमान का मोल नही है आने दो .

कुतर कुतर कर मुल्क स्वार्थी चूहों ने .
खा जाना है, खा जाते हों खाने दो .

कालिमा कालिमा ही बस फैली है .
दीप बुझाओ रौशनी को मत आने दो .

अपने कल को दे के विष अपने हाथों .
घोडे बेच के आत्मा को सो जाने दो .
.
दीप ज़िर्वी
11.7.२०१२

Added by DEEP ZIRVI on July 12, 2012 at 2:30pm — 4 Comments

खजाना खाली है

कहती है सरकार ,खजाना खाली है
बेकल बेरोजगार खजाना खाली है

बिना विभाग के मंत्री पद निर्माण करें ;
जनता के लिए यार ,खजाना खाली है .

अपने हक जो मांगे उन को पीटो बस;
कर लो गिरफ्तार ,खजाना खाली है .

सी .एम् पुत्र तो सी. एम् ही बन जाना है
काहे की तकरार ,खजाना खाली है .

वोटें हैं ,मेहनत हैं ,या फिर जेबें हैं ;
इन की क्यों सोचें यार ,खजाना खाली है .


दीप जीर्वी

Added by DEEP ZIRVI on July 11, 2012 at 7:48pm — 9 Comments

चलो जी चलो कलम उठाएं.चलो जी चलो कलम उठाएं.

चलो  जी चलो कलम उठाएं;चलो  जी चलो कलम उठाएं.

लिख के कविता लेख कहानी,हम लेखक बन जाएं

तदुपरांत वो बकरा ढूंढें जिसको लिखा सुनाएं

चलो  जी चलो कलम उठाएं.चलो  जी चलो कलम उठाएं.

-०-०-०--०-०-०-०-०-०-०-०-

कागज़ कलम ; डाक खर्चे की ;पहले युक्ति लगाएं,

लिख लिख रचनाएँ अपनी ;अख़बारों को भिजवाएं .…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on July 2, 2012 at 8:32am — 6 Comments

आई मिस यू माई डैडी

 मेरे सर पर ,'सुख की छाया ' का पता , प्रभु आप थे .

उस रूप को शत शत नमन जब आप मेरे बाप थे .

सारा जग था आप से आरम्भ , और था आप तक .

आप आप आप प्रभु जी हर तरफ बस आप थे .

आप के सीने से आती वो पसीने की महक .

आप के सीने पे सर था मेरे सीने आप थे .

आपकी आई नही थी , आई बेशक थी मेरी .

मैं गया था इस…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on June 29, 2012 at 8:30am — No Comments

एक ग़ज़ल कहने की कोशिश ...

अब हवा न हो हमारे दरम्यां;
एक मन हैं ;एक तन हों ,एक जां.

तेरी जुल्फों में जो टांगा फूल तो ;
देर तक महकी हैं मेरी उंगलीयां .

तुम मिले होते न हम को गर सनम
मैं समझता जिंदगी है राए-गां.

एक नगमा बन गई हैं जिंदगी ;
कह रही मुझ को तू आ के गुनगुना .

पारसाई तेरी रास आने लगी ;
कर रही है तेरा मुझको निगेह -बाँ.

इश्क ने सब को सिखाई बन्दगी ;
वरना मेरी काविश गई थी राए -गां .

दीप जीरवी

Added by DEEP ZIRVI on June 29, 2012 at 12:00am — No Comments

कौन करेगा तुझे मुझसे जुदा जानम...

यूं तो

मिलते हैं

बिछड़ते हैं

कई लोग मुझसे ;

तेरी बात और है तुम ने

सिर्फ

मुझसे

हाँ मुझ से

मुहब्बत क़ी है

...मेरी झोली में डाले हैं

मुहब्बत के सच्चे मोती ...

...मेरी मुहब्बत क़ी देवी

तुम ने मुझ पे ये

ख़ास इनायत की है .

आती जाती हुई साँसों में

बसी तू तू तू ही ...

...तेरी नजरे करम ने

मेरी ये हालत क़ी है .

सौ जन्म लेकर भी

पा ना पाता हीरा तुम सा ...

... भर के अपनी मुहब्बत से

मेरी झोली

...इनायत क़ी है

. तू…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on June 28, 2012 at 11:30pm — No Comments

...पंजाब है .

{भाव निर्झर }



कितना भोला कितना सादा ;

देखिये पंजाब है .

कटता आया बंटता आया ,

देखिये पंजाब है.

भोलेपन की इंतिहा है ,

सोच के देखे कोई ;

लीडरों की घर की मुर्गी ,

देखिये पंजाब है.

अन्नदाता देस क़ा

खुद फांकता सल्फास है

डालरों की धौंस सहता ,

देखिये पंजाब है..

फिल्म टी वी में दिखे

जो हर चरित्र मसखरा

उनमें पागल दिखने वाला ;

देखिये पंजाब है.;

इन शहीदों की कभी लिखे

अगर कोई किताब

हर जगह पंजाबियों क़ा…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on June 28, 2012 at 11:30pm — 1 Comment

अभिनंदन - अभिनंदन

Added by DEEP ZIRVI on December 24, 2010 at 3:00pm — No Comments

चोर चुरावें मेरी निंदिया

पायल कंगन झुमके बिंदिया

चोर चुरावें मेरी निंदिया ||1

दधक दधक जियरा दधकै

बरसे छम छम बारिश बुंदिया ||2

धडक धडक धड्कावे दिल को

चकवा चितवे है चंदिया  .3

डग मग डग मग डोल रही है ;

नय्या के अंग संग ही नदिया…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on December 16, 2010 at 10:30pm — 2 Comments

मौन

अपना और पराया मौन:

अकुलाया अकुलाया मौन.

जीवन यज्ञ आहुति श्वास ;

धडकन मन्त्र बनाया मौन .

बोलना पीतल;यह सोना है ;

जो हम ने अपनाया मौन .

कभी सुहाग सेज पे लेटा;

शर्माया, सुकुचाया मौन.

कभी विरहाग्नि ने जी भर ;

तरसाया तरपाया मौन.

तिल तिल पलपल ही जीवनभर

देता साथ सुहाया मौन .

प्रेम पगी मीरा का मोहन ;

प्रेम गगन पर छाया मौन .

नाव की ठांव बना कबहूँ यह ;

कबहूँ पतवार बनाया मौन .

श्वासों की माला पे हमने ;

हर दिनरात फिराया… Continue

Added by DEEP ZIRVI on December 6, 2010 at 8:48pm — 4 Comments

महक उठेगी रात की रानी



महक उठेगी रात की रानी



तेरी वेणी में सज कर ही.



चंदनिया शीतल हो गी पर



तेरी काया से लग कर ही .











सुमन सुशोभित हों उप वन में



तेरे आँचल के छूते ही



मानस तल पर विविध छटाएं



बिखरें तुम को छू पल भर ही .







मन मयूर करे नृत्य सुहाना



पुलकित होता हर्षाता है



जब छाते हैं कुंतल



बस तेरे मुख के नभ पर…
Continue

Added by DEEP ZIRVI on November 19, 2010 at 9:40pm — 2 Comments

वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .





सर फिरोशी की तमन्ना है तो सर पैदा करो



वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .



गर मुल्क से इश्क है तो दिल जिगर शैदा करो



वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .



सब यहाँ का खा रहे पर न यहाँ का गा रहे ;



उस शजर को काटते हैं ,छाया जिस से पा रहे.



छाया से जो इश्क है तो पेड़ से पैदा करो



वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .



जो हुए हैं नाम चीन गुलचीं गुलिस्तान के… Continue

Added by DEEP ZIRVI on November 12, 2010 at 6:00am — 4 Comments

तलब तेरी ,इश्क तेरा ,मुहब्बत का असर तेरा .



तलब तेरी ,इश्क तेरा ,मुहब्बत का असर तेरा .



हुई मुद्दत कहा तू ने ,है सब कुछ ये सनम तेरा .



हवा तेरी महक लाये ,फिजा तेरा पता लाये ;



धनक तेरी ,उफक तेराललक तेरी अहम तेरा .



जिस्म तेरा ,अमानत है किसी का, तो रहे होकर;



सुमन तेरा ,महक तेरी , मगर ,तेरा चमन मेरा .



हमारी आस को विश्वास है तेरी मुहब्बत का ;



रहे बन के सनम मेरे ,रहूँ में ही बलम तेरा .



सुरीली तुम ही सरगम हो… Continue

Added by DEEP ZIRVI on November 8, 2010 at 5:00pm — 1 Comment

एहसान




ऐ जिंदगी !

हम एहसान तुझ पर किये जाते हैं

दिल के टुकड़े होने पर भी

उसको पाकर खोने पर भी

मन ही मन रोने पर भी

दर्द जिगर में होने पर भी

ऐ जिंदगी!

हम जिए जाते हैं

हम एहसान तुझ पर किये जाते हैं

{दीप जीरवी}


Added by DEEP ZIRVI on October 24, 2010 at 9:51pm — 2 Comments

बड़े खामोश रहते हैं अभी हम,



बड़े खामोश रहते हैं अभी हम,

सुना है लोग अब भी बोलते हैं .

बड़े दिल से लगाकर दिल यहाँ पर,

सुना है लोग अब दिल तोड़ते हैं.



कभी अमुआ की अमराई पे कोयल ,

कुहू कुहु के गाती गीत थी पर ,

सुबह की शाख पे बैठी कोयल है ,

नगर में गीत कागा छेडते हैं.



धनक खिलती दिखी थी कल जहां पर ,

आज मरघट सा वो पनघट रुआंसा .

जो बुझाया करे थे प्यास कल तक,

आज वोही क्यों प्यासा छोड़ते हैं



वो सागर रूप के… Continue

Added by DEEP ZIRVI on October 24, 2010 at 9:30pm — 3 Comments

काश हर आह सर्द हो जाये,

काश हर आह सर्द हो जाये,
काश हमदर्द दर्द हो जाये .
अब दवा से मुझे क्या लेना ,
ला- दवा मेरा मर्ज़ हो जाये .
मौत री! ले ले मुझ को दामन में ,
दूर जीवन का कर्ज़ हो जाये .
आंसुओ सूख जाना भीतर ही ,
कहीं जग में न नशर हो जाये .
दीप जीर्वी
09815524600

Added by DEEP ZIRVI on October 20, 2010 at 6:48am — 4 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम् "
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
14 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Wednesday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Apr 11
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service