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वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .



सर फिरोशी की तमन्ना है तो सर पैदा करो

वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .

गर मुल्क से इश्क है तो दिल जिगर शैदा करो

वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .

सब यहाँ का खा रहे पर न यहाँ का गा रहे ;

उस शजर को काटते हैं ,छाया जिस से पा रहे.

छाया से जो इश्क है तो पेड़ से पैदा करो

वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .

जो हुए हैं नाम चीन गुलचीं गुलिस्तान के सुनो;

उन की खातिर जोड़ के सर कुछ नया ऐसा बुनो,

वो सबक लें छेड़ें न गुल वो असर पैदा करो ;

वरना छोडो यूं हवा में आप नारे छोड़ना .

deepzirvi9815524600

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Comment by DEEP ZIRVI on June 29, 2012 at 9:13am

asha pande ojha ji,rana partap singh ji,ASHEESH YADV JI NAVIN C CHATURVEDI JI...DHNYVAAD

Comment by asha pandey ojha on January 10, 2011 at 8:14pm
waah bahutkhoob ... nishbd ho gai hun yah nazm padhkar ..

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on November 13, 2010 at 2:14pm
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है....एक क्रांतिकारी के मन की आवाज़

सर फिरोशी की तमन्ना है तो सर पैदा करो....एक क्रांतिकारी ख्याल जिसकी आज बहुत आवश्यकता है
सुन्दर एवं सार्थक लेखन के लिए बधाई|
Comment by आशीष यादव on November 12, 2010 at 2:08pm
WAAH DEEP SAHAB.
सर फिरोशी की तमन्ना है तो सर पैदा करो
गर मुल्क से इश्क है तो दिल जिगर शैदा करो
BILKUL SAHI

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