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Yamit Punetha 'Zaif'
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  • Uttarakhand
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"भावनात्मक दृष्टि से ये ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी यमित जी...बधाई"
Oct 10
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post ग़ज़ल - कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो
"बढ़िया ग़ज़ल कही भाई यमित जी...आदरणीय कबीर साहब की इस्लाह हमेशा कुछ सिखाती है।मुझे '"तो" शब्द भर्ती का लग रहा है।इसके बगैर ग़ज़ल में रवानगी अच्छी आएगी।"
Oct 10
Yamit Punetha 'Zaif' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"एडमिन जी, एक सवाल या फिर ये कह लीजिए अनुरोध है, क्या कभी भविष्य में OBO का android APP बनेगा? ये WEBSITE कितनों के MOBILE पर ठीक से नहीं चलती है। SMART PHONES में भी यही समस्या है, DESKTOP VIEW करके SITE देखनी पड़ती है, फिर हर एक पोस्ट पे जूम करके…"
Oct 7

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"एक सद्प्रयास के लिए बधाइयाँ !  आदरणीय अमरुद्दीन जी ने कई बिन्दुओं पर चर्चा की है.  शुभ-शुभ"
Oct 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"आ. भाई यमित जी, अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है। गुणीजनों की बात का संज्ञान लेकर यह और बेहतर हो सकती है । फिलहाल इस पर बधाई स्वीकारें। "
Oct 4
Samar kabeer commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post ग़ज़ल - कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो
"जनाब यमित पुनेठा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  'इक भी आंसू क्यों गिरे जब आंख शोला-बार हो तोकैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है ग़ौौर करें I  'क्या किसी…"
Sep 30
Samar kabeer commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"जनाब यमित पुनेठा 'ज़ैफ़' जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें I  बाक़ी जनाब अमीरुद्दीन साहिब सब बता ही चुके हैं I "
Sep 30
Yamit Punetha 'Zaif' posted a blog post

ग़ज़ल - कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो

2122 2122 2122 2122 इक भी आंसू क्यों गिरे जब आंख शोला-बार हो तो कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो आपसे है जंग तो मंज़ूर है ये सरफ़रोशी क्या करें जब आपके ही हाथ में तलवार हो तो लग रही है ज़िंदगी भी कुछ दिनों से अजनबी सी लौट आना तुमको मुझसे थोड़ा सा भी प्यार हो तो क्या किसी के सामने अब राज़े-ज़ख़्मे-पिन्हां खोलें आपका ग़म-ख़्वार ही जब दुश्मनों का यार हो तो तूने गरचे तोड़ डाले सारे नाते एक पल में एक वहशी को तिरा गर आज भी इंतिज़ार हो तो? © मौलिक व अप्रकाशितSee More
Sep 30
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"'सर पीटते ही रह गए उस आस्ताँ से हम'   इस मिसरे का वाक्य विन्यास सही नहीं है 'आस्ताँ से हम' 'आस्ताँ पे हम' हो रहा है इसलिए रदीफ़ से इन्साफ़ नहीं हो रहा है। देखियेगा, सादर। "
Sep 30
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"जनाब यमित पुनेठा 'ज़ैफ़' जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। भागें कहाँ तलक ग़मे-आहो-फ़ुगाँ से हम जाऐंगे तेरे इश्क़ में इक रोज़ जाँ से हम      मतले के मिसरों में रब्त का अभाव है, ऊला मिसरे का…"
Sep 29
Yamit Punetha 'Zaif' commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"शुक्रिया अमन जी। आभार।"
Sep 29
AMAN SINHA commented on Yamit Punetha 'Zaif''s blog post तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
"आज कुछ नए लफ्ज़ सिखा मैने। आपका शुक्रिया "
Sep 29
Yamit Punetha 'Zaif' posted a blog post

तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)

221 2121 1221 212भागें कहाँ तलक ग़मे-आहो-फ़ुगाँ से हमजाऐंगे तेरे इश्क़ में इक रोज़ जाँ से हमबोला था सच, पलट नहीं पाए बयाँ से हमअब तंग आ चुके हैं ख़ुद अपनी ज़बाँ से हमलो देखते ही देखते सब सफ़्हे जल पड़ेक्या लिख गए सियाही-ए-सोज़े-निहाँ से हम!इक फूल था कि मुरझा गया सर-ए-गुलसिताँइक उम्र थी कि गुज़रे थे दौरे-ख़िजाँ से हमआओ सिखा दूं तुमको निगाहों की गुफ़्तगूअब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हमआना नहीं था उसको नहीं आया 'ज़ैफ़' वोसर पीटते ही रह गए उस आस्ताँ से हम© मौलिक व अप्रकाशितSee More
Sep 28
Yamit Punetha 'Zaif' updated their profile
Sep 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Almora Uttrakhand
Native Place
Almora
Profession
Working
About me
Passionate writer

(तरही ग़ज़ल - अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)
221 2121 1221 212

भागें कहाँ तलक ग़मे-आहो-फ़ुगाँ से हम
जाऐंगे तेरे इश्क़ में इक रोज़ जाँ से हम

बोला था सच, पलट नहीं पाए बयाँ से हम
अब तंग आ चुके हैं ख़ुद अपनी ज़बाँ से हम

लो देखते ही देखते सब सफ़्हे जल पड़े
क्या लिख गए सियाही-ए-सोज़े-निहाँ से हम!

इक फूल था कि मुरझा गया सर-ए-गुलसिताँ
इक उम्र थी कि गुज़रे थे दौरे-ख़िजाँ से हम

आओ सिखा दूं तुमको निगाहों की गुफ़्तगू
अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम

आना नहीं था उसको नहीं आया 'ज़ैफ़' वो
सर पीटते ही रह गए उस आस्ताँ से हम

© मौलिक व अप्रकाशित

Yamit Punetha 'Zaif''s Blog

ग़ज़ल - कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो

2122 2122 2122 2122



इक भी आंसू क्यों गिरे जब आंख शोला-बार हो तो

कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो



आपसे है जंग तो मंज़ूर है ये सरफ़रोशी

क्या करें जब आपके ही हाथ में तलवार हो तो



लग रही है ज़िंदगी भी कुछ दिनों से अजनबी सी

लौट आना तुमको मुझसे थोड़ा सा भी प्यार हो तो



क्या किसी के सामने अब राज़े-ज़ख़्मे-पिन्हां खोलें

आपका ग़म-ख़्वार ही जब दुश्मनों का यार हो तो



तूने गरचे तोड़ डाले सारे नाते एक पल में

एक वहशी…

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Posted on September 29, 2021 at 7:30pm — 2 Comments

तरही ग़ज़ल - (अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम)

221 2121 1221 212



भागें कहाँ तलक ग़मे-आहो-फ़ुगाँ से हम

जाऐंगे तेरे इश्क़ में इक रोज़ जाँ से हम



बोला था सच, पलट नहीं पाए बयाँ से हम

अब तंग आ चुके हैं ख़ुद अपनी ज़बाँ से हम



लो देखते ही देखते सब सफ़्हे जल पड़े

क्या लिख गए सियाही-ए-सोज़े-निहाँ से हम!



इक फूल था कि मुरझा गया सर-ए-गुलसिताँ

इक उम्र थी कि गुज़रे थे दौरे-ख़िजाँ से हम



आओ सिखा दूं तुमको निगाहों की गुफ़्तगू

अब तुमसे दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से… Continue

Posted on September 28, 2021 at 6:46pm — 8 Comments

कोई ऐसा मिला प्यार की राह में

कोई ऐसा मिला प्यार की राह में,

इक नज़र में ही उसपर फ़िदा हो लिए..

क्या कशिश थी उन आंखों में, हम क्या कहें?

देखते ही वो मेरे ख़ुदा हो लिए..

-

उनकी सूरत की जो रोशनी मिल गयी

शायरी के लिए, शायरी मिल गयी.

एक पल में न जाने ये क्या हो गया?

हमको ऐसा लगा हर ख़ुशी मिल गयी.



इस नज़ाकत से उनकी निगाहें झुकीं,

दिल के अहसास सारे फ़ना हो लिए..

(कोई ऐसा मिला प्यार की राह में,

इक नज़र में ही उसपर फ़िदा हो लिए..)

**

शाम ढल-सी गयी, रात होने… Continue

Posted on April 7, 2017 at 11:03am — 7 Comments

ग़ज़ल - चींटियों को देखना तुम

2122 2122 2122 212



होंठ पर अटकी सदा की लर्ज़िशें* क्या होती हैं?

छोड़ दें जब साथ अपने, गर्दिशें क्या होती हैं?



आपने दिल तोड़ डाला खेलकर जज़्बात से,

मेरे टूटे दिल से पूछो, ख़्वाहिशें क्या होती हैं?



क्यों हुई घर में लड़ाई, ये बड़ों से पूछिये!

बच्चों से मत पूछिये के रंजिशें* क्या होती हैं?



छूटने की, मौत से, होती हैं सौ गुंजाइशें,

ज़िंदगी से बचने की गुंजाइशें क्या होती हैं?



दो दिलों में प्यार होना सर्द बूँदों के तले,

इश्क़ वालों… Continue

Posted on February 8, 2015 at 2:40pm — 8 Comments

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At 10:35pm on March 18, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

स्वागत है , भाई यमित आपका ओ बी ओ मे ॥

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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