For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
Share

Aazi Tamaam's Friends

  • Mamta gupta
  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"
  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • Saurabh Pandey
 

Aazi Tamaam's Page

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय ब्रज जी बस कोशिश जारी है आपका आभार ग़ज़ल तक आने के लिये ऐसा लगता है की शायद दोषरहित ग़ज़ल लिखना असंभव है अभी तक तो बाकी तो सब गुणीजनों की इस्लाह से इतना हुआ है कोशिश रहेगी आगे भी सुधार हो समर गुरु जी जैसे निस्वार्थ इस्लाहकारों को ख़ुदा…"
Monday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय अमीर जी सहृदय शुक्रिया ग़ज़ल तक आने के लिये आपका दिल से आभार"
Monday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
" सहृदय शुक्रिया आ नूर जी आपकी ग़ज़ल मुझे बहुत पसंद आती है ग़ज़ल तक आने के लिये शुक्रिया मैं इस ग़ज़ल को जल्द ही दुरुस्त कर दूंगा कोशिश जारी है"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"भाई आजी तमाम जी जिस तरह से आप मेहनत कर रहे हैं...निश्चय ही एक दिन दोषरहित ग़ज़ल कहेंगे...ऐसी मेरी शुभकामनाएं हैं।"
Sunday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, ग़ज़ल की अच्छी कोशिश हुई है बधाई स्वीकार करें। मुहतरम समर कबीर साहिब ने मुकम्मल इस्लाह कर दी है।  सादर। "
Oct 14
Aazi Tamaam's blog post was featured

ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लियेकिसी के हुस्न का सैलाब देखने के लियेकहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आयेवो गुलबदन वो आब ओ ताब देखने के लियेन जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमकोन जाने कब से थे बेताब देखने के लियेछुआ तो जाना हर इक ख़ाब था धुंआ यारोबचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लियेकरीब जा के हर एक चीज खोयी है हमनेलुटे हैं खुद को ही ईजाब देखने के लियेकटी है ज़िंदगी अपनी भी यूँ उसूलों परफ़ज़ा में रह गया तल्ख़ाब देखने के लियेहाँ एक बार किया था भरम निग़ाहों नेदिली पसंद का आदाब देखने…See More
Oct 14
Nilesh Shevgaonkar commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"आ. आज़ी साहबमतला क्या कहना चाहता है यह स्पष्ट नहीं है..बाकी सब समर सर कह ही चुके हैं..प्रयास के लिए बधाई सादर "
Oct 14
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
" सादर प्रणाम गुरु जी सहृदय शुक्रिया ग़ज़ल पर बारीकी से गौर फरमाने के लिये दिल से आभार मैं कोशिश करूँगा दुरुस्त करने की"
Oct 11
Samar kabeer commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है , बधाई स्वीकार करें  I  `किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये किसी के हुस्न का सैलाब देखने के लिये` मतला नहीं हुआ , दोनों मिसरे अलग अलग हैं इनमें रब्त पैदा नहीं हो सका ,…"
Oct 11
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लियेकिसी के हुस्न का सैलाब देखने के लियेकहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आयेवो गुलबदन वो आब ओ ताब देखने के लियेन जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमकोन जाने कब से थे बेताब देखने के लियेछुआ तो जाना हर इक ख़ाब था धुंआ यारोबचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लियेकरीब जा के हर एक चीज खोयी है हमनेलुटे हैं खुद को ही ईजाब देखने के लियेकटी है ज़िंदगी अपनी भी यूँ उसूलों परफ़ज़ा में रह गया तल्ख़ाब देखने के लियेहाँ एक बार किया था भरम निग़ाहों नेदिली पसंद का आदाब देखने…See More
Oct 10
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नहीं कर कुन्द पाओगे कलम की धार नेता जी
"सुंदर ग़ज़ल के लिये ह्रदय से बधाई धामी सर ये ग़ज़ल मुझे आपकी बेहद पसंद आई आ अमीर जी से सहमत हूँ सुधार के विषय में"
Aug 12
Aazi Tamaam commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मेरी माँ)
"बेहद भावपूर्ण सुंदर ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें आ"
Aug 12
Mamta gupta and Aazi Tamaam are now friends
Jul 30
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"हौसला अफ़ज़ाई का सहृदय शुक्रिया जनाब सादर"
Jul 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"सहृदय शुक्रिया आ हौसला अफ़ज़ाई के लिये आभार जी आ सर की इस्लाह सर आँखों पर"
Jul 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"सहृदय शुक्रिया आ rozina जी हौसला अफ़ज़ाई के लिये आभार"
Jul 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
About me
Poetic Nature

Aazi Tamaam's Photos

  • Add Photos
  • View All

Aazi Tamaam's Blog

ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112

किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

किसी के हुस्न का सैलाब देखने के लिये

कहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आये

वो गुलबदन वो आब ओ ताब देखने के लिये

न जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमको

न जाने कब से थे बेताब देखने के लिये

छुआ तो जाना हर इक ख़ाब था धुंआ यारो

बचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लिये

करीब जा के हर एक चीज खोयी है हमने

लुटे हैं खुद को ही ईजाब देखने के…

Continue

Posted on October 10, 2021 at 12:15pm — 8 Comments

ग़ज़ल: ज़ुमुररुद कब किसी मुफ़्लिस के घर चूल्हा जलाता है

1222 1222 1222 1222

ज़ुमुररुद कब किसी मुफ़्लिस के घर चूल्हा जलाता है

मिरी जाँ ये तो बस शाहों कि पोशाकें सजाता है

रिआया भी तो देखो कितनी दीवानी सी लगती है

उसी को ताज़ कहती है जो इनके घर जलाता है

नगर में नफ़रतों के भी महब्बत कौन समझेगा

ए पागल दिल तू वीराने में क्यों बाजा बजाता है

हमारे हौसले तो कब के आज़ी टूट जाते पर

ये नन्हा सा परिंदा है जो आशाएँ जगाता है

कोई बेचे यहाँ आँसू तो कोई…

Continue

Posted on June 24, 2021 at 6:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है

122 122 122 122

उठाकर शहंशह क़लम बोलता है

चढ़ा दो जो सूली पे ग़म बोलता है

ये फरियाद लेकर चला आया है जो

ये काफ़िर बहुत दम ब दम बोलता है

जुबाँ काट दो उसकी हद को बता दो

बड़ा कर जो कद को ख़दम बोलता है

गँवारों की वस्ती है कहता है ज़ालिम

किसे नीच ढा कर सितम बोलता है

बिठाता है सर पर उठाकर उसी को

जो कर दो हर इक सर क़लम बोलता है

बड़ी बेबसी में है जीता वो ख़ादिम

बड़ाकर जो…

Continue

Posted on June 15, 2021 at 4:30pm — 6 Comments

नग़मा: दिल

1222 1222 1222 1222

अज़ीब इस दिल की बातें हैं अज़ीब इसके तराने हैं

अज़ीब ही दर्द है इसका अज़ीब ही दास्तानें हैं

अज़ीब अंज़ाम है इसका अज़ीब आग़ाज़ करता है

अगर जो टूट भी जाये तो ना आवाज़ करता है

कभी सुरख़ाब करता है कभी बेताब करता है

दिल ए नादाँ............. दिल ए नादाँ...........

दिल ए नादाँ हर इक ख़्वाहिश को ही आदाब करता है

ये करतब कितनी आसानी से यारो दिल ये करता है

कभी ये ज़ख़्म देता है,…

Continue

Posted on June 10, 2021 at 10:23am — 2 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//इस पर मुहतरम समर कबीर साहिब की राय ज़रूर जानना चाहूँगा// 'पहले दफ़्न 'आरज़ू' दिल…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"//यहाँ पर मैं उन के आलेख से सहमत नहीं हूँ. उनके अनुसार रहे और कहे आदि में इता दोष होगा-यह कथ अपने…"
5 hours ago
Anita Maurya posted blog posts
6 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया

वज़्न - 22 22 22 22 22 2उनसे मिलने का हर मंज़र दफ़्न किया सीप सी आँखों में इक गौहर दफ़्न कियादिल…See More
7 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"मुहतरमा अनिता मौर्य जी आदाब, अच्छे अशआर कहे आपने, दाद क़ुबूल फ़रमाएं। समर कबीर साहिब से सहमत हूँ।…"
14 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on vijay nikore's blog post श्रध्दांजलि
"आदरणीय विजय निकोर जी , आपकी लेखनी के साथ साथ आपके विचार बहुत गंभीर होते हैं और भावनाएं मानवता से…"
18 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"आदरणीय सुशील सरना जी , सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ…"
19 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"अच्छा है , बधाई , सादर."
19 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"मुहतरमा अनिता मौर्य जी आदाब, अच्छे अशआर कहे आपने, दाद क़ुबूल फ़रमाएं। समर कबीर साहिब से सहमत हूँ।…"
20 hours ago
Samar kabeer commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"मुहतरमा अनीता मौर्य जी आदाब, ओबीओ पर आपकी ये पहली रचना है शायद । अच्छे अशआर हैं, इसे ग़ज़ल इसलिये…"
21 hours ago
Samar kabeer and Anita Maurya are now friends
22 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//अजदाद आदत के रूप में भी हम में रहते हैं// ये तो बच्चे भी जानते हैं, आप मुझे ये समझाइये कि किसी की…"
23 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service