For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बच्ची नही यह आँधी है,
कल की इंदिरा गाँधी है,

Views: 329

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 11, 2011 at 3:14pm

आदरणीय अरुण निगम जी, आपका बहुत बहुत आभार, आपके माध्यम से एक बेहद खुबसूरत कविता के रूप में बिटिया को आशीर्वाद मिला है, इस बेहद खुबसूरत अभिव्यक्ति हेतु आदरणीया श्रीमती सपना निगम जी को बहुत बहुत बधाई |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on December 11, 2011 at 2:30pm

प्यारी बिटिया को देख कर श्रीमती सपना निगम द्वारा रचित यह कविता याद आ गई.

आन  बान  और शान है बेटी

गीता  और  कुरान  है   बेटी.

गर्व  करें   अपनी   बेटी  पर

जन गण मन का गान है बेटी.

 

बेटे    जैसा    खूब    पढ़ायें

नव-युग का आह्वान है बेटी.

बेटी मिली -  भाग्य सहरायें

ईश्वर  का  वरदान  है  बेटी.

 

थकी हुई बोझिल- सी माँ के

अधरों की  मुस्कान  है बेटी

जीवन की हर धूप छाँव में

सुख-दु:ख की पहचान है बेटी.

 

कभी  कलाई  सूनी  ना  हो

भाई  का  सम्मान  है  बेटी.

सुख का रस जीवन में घोले

माता-पिता की जान है बेटी.

 

दुर्गा ,लक्ष्मी, सरस्वती – सी

सचमुच  शक्तिमान है  बेटी.

लाख यज्ञ का  पुण्य दिलाये

ऐसा   कन्यादान   है   बेटी.

 

श्रीमती सपना निगम

आदित्य नगर , दुर्ग

छत्तीसगढ़.

 

 

Comment by satish mapatpuri on August 23, 2011 at 12:01am

बहुत प्यारी है. मेरा आशीर्वाद.

Comment by Shanno Aggarwal on August 22, 2011 at 10:59pm

गणेश, तो बबली की भोली मुस्कान के पीछे शैतानियत भी छुपी है.

सभी बच्चे शैतान ही होते हैं...तुम भी रहे होगे या क्या पता अब भी हो शायद ..हा हा   

Comment by इमरान खान on August 22, 2011 at 10:58pm
सुबहान अल्लाह, चश्मे बद दूर!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 22, 2011 at 10:42pm

शन्नो दीदी, यह बबली है और शैतानी .......हा हा हा , बहुत करती है,

Comment by Shanno Aggarwal on August 22, 2011 at 10:18pm

गणेश, दिल को मोह लेने वाली मुस्कान चेहरे पर लिये आपकी इस प्यारी सी बिटिया को मेरा ढेर सारा आशीर्वाद.

 

बिटिया को: नमस्ते मैडम जी..लेकिन आपके पापा ने आपका नाम तो बताया ही नहीं...और आप इतनी भोली सी हैं कि शैतानी का तो नाम ही नहीं जानती होंगी शायद :)))) 

Comment by guddo dadi on January 27, 2011 at 9:27am

आशीर्वाद बिट्टो

बहुत सुंदर हैं

Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on December 19, 2010 at 3:24pm

so cuteeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee & innocent.........kya sweet smile hai..


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 15, 2010 at 8:10pm

Very Cute Indeed

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service