For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय काव्य-रसिको !

सादर अभिवादन !!

  

’चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह एक सौ चौहत्तरवाँ योजन है।

 .   

 

छंद का नाम  -  सरसी छंद  

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ - 

20 दिसम्बर’ 25 दिन शनिवार से

21दिसम्बर 25 दिन रविवार तक

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं.  

सरसी छंद के मूलभूत नियमों के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा कि विदित है, कई-एक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती हैं.

***************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 


फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ -

20 दिसम्बर’ 25 दिन शनिवार से 21दिसम्बर 25 दिन रविवार तक रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रस्तुत की जा सकती हैं। 

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करें.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें. 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. 
  8. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  9. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...


"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम 

Views: 602

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

स्वागतम

जय-जय, जय हो 

सरसी छंद

+++++++++

रोहिंग्या औ बांग्ला देशी, बदल रहे परिवेश।

शत्रु बोध यदि नहीं हुआ तो, पछताएगा देश॥

लाखों भूखे नंगे आये,  सह अपराधी तत्व।

किन्तु पार्टियाँ वोट बढ़ाने, देते इन्हें महत्व॥

 

घुस पैठ किये फिर बस जाते, भारत में सर्वत्र।

जोड़ तोड़कर बनवा लेते, स्वयं पहचान पत्र।

नगर किनारे बस जाते हैं, आतंकी निर्बाध।

संत बने रहते हैं दिन में, रात करें अपराध॥

 

ढूंढ ढूंढकर नकली सारे, भेजें सीमा पार।

होगा तभी सुरक्षित भारत, औ सबका उद्धार॥

नाम जुड़े वोटर सूची में, विवरण हो सब ठीक।

सच्चे भारत वासी बनकर, रहो सदा निर्भीक॥

++++++++++++

मौलिक अप्रकाशित

 

आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, आपने प्रदत्त चित्र के मर्म को समझा और तदनुरूप आपने भाव को शाब्दिक भी किया है. मतदान की प्रक्रिया में किसी का शामिल होना और देश का नागरिक होना दोनों को दो बातें कह कर प्रचारित अवश्य की जा रही हैं. लेकिन भारत का कोई नागरिक ही तो मतदान की प्रक्रिया में भाग लेगा, इसमें तो किसी को संशय नहीं होना चाहिए. 

 

रोहिंग्या औ बांग्ला देशी, बदल रहे परिवेश।  ,,,,,,,,, सही बात 

शत्रु बोध यदि नहीं हुआ तो, पछताएगा देश॥    ...   अवश्य.ही कोई देश अपनी भूमि पर घुसपैठियों को इस तरह से बर्दाश्त नहीं करता 

लाखों भूखे नंगे आये,  सह अपराधी तत्व।  .........    इस पंक्ति के माध्यम से पड़ोसी देशों की हालत भी उजागर हो रही है.  

किन्तु पार्टियाँ वोट बढ़ाने, देते इन्हें महत्व॥  .......   .बिल्कुल. सही बात. अलबत्ता, पार्टी स्त्रीलिंग संज्ञा होने से ’देती इन्हें महत्व’ होगा 

 

घुस पैठ किये फिर बस जाते, भारत में सर्वत्र। ...  .. तार्किक 

जोड़ तोड़कर बनवा लेते, स्वयं पहचान पत्र।  .......  ’स्वयं पहचान-पत्र’ का विन्यास छंद के हिसाब से साधा जाना उचित होगा  

नगर किनारे बस जाते हैं, आतंकी निर्बाध।

संत बने रहते हैं दिन में, रात करें अपराध॥ .........   वाह 

 

ढूंढ ढूंढकर नकली सारे, भेजें सीमा पार।

होगा तभी सुरक्षित भारत, औ सबका उद्धार॥  .......  सशक्त तर्क

नाम जुड़े वोटर सूची में, विवरण हो सब ठीक।   

सच्चे भारत वासी बनकर, रहो सदा निर्भीक॥ ......... बहुत सही 

आपकी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाइयाँ 

शुभातिशुभ

आदरणीय सौरभ भाईजी

हार्दिक आभार धन्यवाद , उचित सुझाव एवं सरसी छंद की प्रशंसा के लिए।

१.... व्याकरण संबंधी सामान्य ज्ञान होते हुए भी लापरवाही के कारण छोटी त्रुटियाँ भी हो जाती हैं।

२.... घुस पैठ किये फिर बस जाते, भारत में सर्वत्र। 

जोड़ तोड़कर बनवा लेते, खुद पहचान प्रपत्र।।

छंंद विन्यास के अनुसार यदि यह शंसोधन सही / गलत  जो भी हो  इस पर भी अपनी टिप्पणी देने की  कृपा करें ताकि आवश्यक संशोधन कर सकूं। 

सादर 

"जोड़-तोड़कर बनवा लेते, सारे परिचय-पत्र".......इस तरह कर लें तो बेहतर होगा आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब. सादर 

आदरणीय अशोक भाईजी 

वाह !! सुंदर सरल सुझाव 

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्रानुसार घुसपैठ की ज्वलंत समस्या पर आपने अपने छंदों के माध्यम से ध्यान आकृष्ट किया है. इसकी हानियों को भी बताया है.  बाकी तो चुनाव आयोग अपना कार्य कर ही रहा है. चित्र के एक सार्थक पहलु को आपने केंद्र में लिया है. हार्दिक बधाई स्वीकारें. छंदों में अवश्य कुछ वाक्य विन्यास गेयता अनुरूप नहीं हैं. सादर 

आदरणीय अशोक भाईजी

हार्दिक धन्यवाद , छंद की प्रशंसा और सुझाव के लिए।

वाक्य विन्यास और गेयता की समस्या मेरी रचनाओं में प्रायः रहती है। दूर करने का प्रयास करते रहूंगा।

जिन पंक्तियों में गेयता कीसमस्या है कृपया उसे भी संशोधित कर दीजिए।  

सादर

आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। चित्रानुसार सुंदर छंद हुए हैं और चुनाव के साथ घुसपैठ की समस्या पर को भी आपने उभारा है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण भाईजी 

रचना को समय देने और प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद आभार ।

 

सरसी छंद  :

हार हताशा छुपा रहे हैं, मोर   मचाते  शोर ।

व्यर्थ पीटते हैं छाती वो, चुनाव थे कमजोर।।

बसा  विदेशी  जीत  रहे  थे, करते   रहते    खेल ।

मौज किया करते जीवन भर, मुफ्त सफ़र वो रेल ।।

रीढ़ बने रोहिंग्या उनकी, जाँच बनी है  काल ।

हाहाकार मचाते अब वो, मरते कहीं अकाल।।

मौज मस्ती हुई  गायब है, होगा अब सन्यास । 

राजनीति मरूधरा दलदल, पुनर्वास सायास।।

पीट  रहे  हैं  छाती  दल, जो करते व्यापार ।

कि वोट खरीदकर उनका, होता बेड़ा पार ।।

मार दहाड़ रो रहे अब दल, होगा        बंटाधार  ।

वोट चुराता अपराधी वो , मर  एस आई आर ।।

मौलिक व अप्रकाशित 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
11 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
yesterday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
yesterday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
yesterday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
May 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service