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सर कल्म के वास्ते तैयार होना चाहिये।
इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये।।
जश्न में शामिल होने वाले दोस्तों
रंजो-गमों मे भी हमवार होना चाहिये।।
घोडा घास से यारी करेगा तो खाएगा क्या।
बिन निस्बतों-लिहाज व्यापार होना चाहिये।।
अन्ना की तमन्ना के मुताबिक मुल्क से।
नौ दौग्यारह भ्रष्टाचार होना चाहिये।।
ईमानदारों से सजा दरबार होना चाहिये।
बेईमान बिल्कुल दरकिनार होना चाहिये।।
वजन से ज्यादा किसी पे ना भार होना चाहिये।
सीधा सरल व्यवहार होना चाहिये।।
खुशियों से भरा घर-संसार होना चाहिये।
रोज-रोज नहीं कहीं रार होना चाहिये।।
स्कूलों में पोषाहार की तरह यतीमों का भीे।
दो जून का भोजन तो सरकार होना चाहिये।।
मालिक से राबिता इकतार होना चाहिये।
इंसाॅं को इंसाॅं से प्यार होना चाहिये।।
घडी में तोला और घडी में माशा ना बनो चंदन।
अमीरी-गरीबी में इकसार होना चाहिये।।

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Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 1, 2011 at 11:06am

भाई नेमीचंद जी उपरोक्त पंक्तियों के माध्यम से बड़ी ही अच्छी भावना व्यक्त की है आपने ! इस निमित्त हार्दिक आभार स्वीकार करें!

कृपया ध्यान दे...

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