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नौ की महत्ता - इति सिद्धम्

महानुभावों "नौ" की महत्ता तो जगजाहिर है ।
यह सबसे बड़ा अंक है । (० से ९)
नौ का गुणनफल करने पर भी प्राप्त संख्या के
अंकों का योग नौ ही होता है । जैसे- अठारह (१+८=९),
सत्ताईस (२+७=९),छत्तीस (३+६=९),पैंतालिस (४+५=९),
चौवन (५+४=९),तिरसठ (६+३=९),बहत्तर (७+२=९),
एकासी (८+१=९),नब्बे (९+०=९) ..........जहाँ तक जाएँगे...वहाँ तक...(९०+९=९९= ९+९=१८= ९)..........अनंत......

नौ की महत्ता को प्रतिपादित करती हैं ये मेरी पंक्तियाँ -

राम के नाम को देखें,
कितना पवित्र और शुद्ध,
इसी नाम का स्मरण करते,
हर क्षण ब्रह्म और रुद्र ।

हिंदी जगत के वर्ण का,
सत्ताइसवाँ व्यंजन है 'र',
'र' पर सुशोभित 'आ' भी है,
जो है हिंदी का द्वितीय स्वर ।

'म' की कृपा तो देखें,
यह है बड़ा महान,
पच्चीसवाँ व्यंजन है यह,
जिसको जानता पूर्ण जहान ।

इस प्रकार राम में समाहित,
अक्षरों का योग चौवन,
चौवन यानि 'पाँच' 'चार' नौ,
फिर 'नौ' से बड़ी शक्ति कौन ।

नौ ही है सबकुछ,
सबको समाहित किए,
सबसे बड़ा होने का गौरव,
ऋषि,मुनियों ने इसे दिए ।

ऐसे ही सीता को भी,
सब जगत जननी माने,
इस नाम महिमा को भी,
प्रेम पल्लवित हृदय से जानें ।

हिंदी जगत का बत्तीसवाँ व्यंजन,
'स' शुभ है सच्चा वर,
'ई' जो है इसकी माँ,
हिंदी जगत की चतुर्थ स्वर ।

'त' सोलहवें पर स्थित,
द्वितीय स्वर 'आ' के साथ,
सीता में भी चौवन अंक,
राम हैं विदेह पुत्री के नाथ ।

राम चौवन, सीता चौवन,
दोनों हो गए एक सौ आठ,
एक,शून्य,आठ को जोड़े,
दोनों मिलकर जग के नाथ ।

या राम नौ, सीता भी नौ,
दोनों का योग है अठारह,
एक, आठ का योग हुआ नौ,
अब क्या बच गया रह ।

जिस नौ की इतनी महिमा,
वह साक्षात ईश्वर है,
वह कल्याण करे सबका,
वह आदिशक्ति अंकवर है ।


-प्रभाकर पाण्डेय

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on July 11, 2010 at 6:45pm
प्रभाकर जी अंक ९ की महत्ता और उसकी विशेषता का सूक्ष्म निरिक्षण किया है आपने. जिसे काव्य रूप में देखना भी अच्छा लगा. आप बधाई के पात्र है .

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 10, 2010 at 8:14pm
वाह प्रभाकर भैया हम log hamesha ९ को पढे है पर ९ का महातम्य इतना व्यापक है यह आज हमे पता चला , अंको पर आधारित यह कविता और लेख वाकई कमाल का है, जय हो ,

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