For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल....ख्वाब सारे अनमने हैं

​2122        2122        2122
बेदिली के अनवरत ये सिलसिले हैं
इसलिये तो ख्वाब सारे अनमने हैं

बाद मुद्दत के सफ़र आया वतन तो
थे बशर बिखरे हुये घर अधजले हैं

बादलों औ बारिशों ने साजिशें कीं 
भूख की संभावनायें सामने हैं

अस्ल ए इंसानियत मजबूत रक्खो
हर कदम पे ज़िन्दगी में जलजले हैं

इस शहर में चीखने से कुछ न होगा
गूंगी जनता शाह भी बहरे हुये हैं

(​मौलिक एवं अप्रकाशित)

बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 386

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 3, 2016 at 8:08pm

आपकी सलाह सर्वथा उचित है आदरणीय....सुधार की कोशिश करता हूँ :) :)

Comment by Samar kabeer on September 3, 2016 at 7:49pm
जी , में आपसे सहमत नहीं हूं,आम बोलचाल की भाषा आम लोगों के लिये होती है,लेकिन आप शाइर हैं तो आप पर दोहरी ज़िम्मेदारी आ जाती है,आम लोगों को फिर कौन बताएगा कि सही शब्द क्या है,अगर ऐसा न होता तो शब्दकोष की क्या ज़रूरत होती ।अब आप क्या कहेंगे ?
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 3, 2016 at 7:42pm

आपकी सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय सुरेश कुमार 'कल्याण' जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 3, 2016 at 7:39pm

आदरणीय आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला' जी रचना पटल पे आपका अभिनन्दन एवं आभार.... 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 3, 2016 at 7:37pm

प्रणाम आदरणीय  Samar kabeer साहब आप मेरे लिए प्रेरणास्रोत हैं...आप बड़ों से ही सीख रहा हूँ और आपकी बात शिरोधार्य है...लेकिन आपसे थोड़ा विरोधाभाष है...मुझे लगता है कि अगर रचना में आम बोलचाल के शब्दों को स्थान दिया जाये तो रचना ज्यादा कर्णप्रिय हो सकती है आपकी सलाह की प्रतीक्षा में ....

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on September 1, 2016 at 12:30pm
आदरणीय बृजेश जी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई प्रेषित है । सादर ।
Comment by आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला' on August 31, 2016 at 3:34pm

अच्छी रचना हेतु बधाई ब्रज जी !!!

Comment by Samar kabeer on August 31, 2016 at 10:22am
'मामला'शब्द धीरे धीरे प्रचलन में आ गया है, और आम लोग बोल चाल में भी यही बोलते हैं,लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि जहां तक हो सके शाइरी में हमें सही शब्द का ही प्रयोग करना चाहिये क्यों कि हम आम लोग नहीं हैं न,आपका क्या खयाल है ?
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 30, 2016 at 10:22pm

प्रणाम आदरणीय  Samar kabeer साहब आपके अमूल्य समय और सार्थक समीक्षा के लिए आपका ह्रदय्तल
से आभार लेकिन आदरणीय हम आम बोलचाल में और कई बार लिखने में मामला ही इस्तेमाल करते हैं....ऐसा क्यों?

Comment by Samar kabeer on August 28, 2016 at 2:45pm
जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज'साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
आपकी जानकारी के लिये बता रहा हूँ कि तीसरे शैर के ऊला मिसरे में सही शब्द है"मुआमला"।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहब"
12 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"सहीह शब्द "बेवज्ह"221 है,रदीफ़ "बेसबब" कर सकते हैं ।"
12 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहब जी मैं रदीफ को बदलकर बेवजह कर दूंगा।"
13 hours ago
रणवीर सिंह 'अनुपम' commented on Hariom Shrivastava's blog post योग छंद
"आदरणीय सुंदर सृजन। चरण 8 - में लय भंग है। कारण 5वीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है, जो नहीं होना…"
13 hours ago
रणवीर सिंह 'अनुपम' updated their profile
14 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post 'तुरंत' के दोहे ईद पर (१०६ )
"भाई रणवीर सिंह 'अनुपम'  जी ,  इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार एवं…"
14 hours ago
रणवीर सिंह 'अनुपम' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post 'तुरंत' के दोहे ईद पर (१०६ )
"बहुत सुंदर दोहे।"
14 hours ago
Profile Iconरणवीर सिंह 'अनुपम' and Ananya Dixit joined Open Books Online
14 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"//जनाब अमीरुद्दीन खान साहब के अनुसार खामखा रदीफ में ले सकते हैं?// नहीं ले सकते,आपको रदीफ़ बदलना…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"//जानना चाहता हूँ कि क्या लफ़्ज़ ख़ामख़ा लेना दुरुस्त है या नहीं अगर दुरुस्त है तो क्या लफ़्ज़…"
14 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ईद कैसी आई है!
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से…"
15 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब आदाब मेरे ब्लॉग की सारी ग़ज़लों पर आपकी इस्लाह और मार्ग दर्शन मिला है. ये ग़ज़ल…"
15 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service