For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रंगों की दुनिया में असुरक्षा का माहौल बनता देख लाल ,पीले और नीले रंग के मंत्रियों ने सफ़ेद रंग के सरदार से आपात मीटिंग बुलाने को कहा /हर तरह के रंगों को आमंत्रित किया गया /.... मीटिंग शुरू हुई --मुद्दा था ऐसा क्या करें कि हर वर्ग हमें प्यार से देखे /..... लाल और पीले रंग बोल उठे ,हमारे रंग को हिन्दुओं ने पसंद कर लिया ,मुसलमान हमारी तरफ अजीब नज़रों से देखते हैं /.... नीले और पीले एक साथ  कहने लगे हम दोनों से बने हरे रंग को मुसलमानों ने अपना लिया , हिन्दू हमें नफरत की नज़र से देखते हैं /..... इसी बीच शोहरत ,ग़ुरूर और दौलत  के रंग तैश में बोले हम अमीरों के हिस्से में आगये ,गरीब हम तक पहुँच नहीं पाते /........ हर रंग अपनी अपनी दास्ताने बर्बादी अपने तरीक़े से बयान कर रहा था और स्टेज पर विराजमान सफ़ेद रंग जो ख़ुद अपने आप में रंग नहीं कई रंगों का मिश्रण है सबकी दलीलें सुन कर धीरे धीरे मुस्करा रहा था। ...... 

.

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 267

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 4, 2016 at 8:41pm

जनाब मिथिलेश साहिब ,  हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 4, 2016 at 12:07am

रंगो को प्रतीक बनाकर बहुत बढ़िया लघुकथा लिखी है आदरणीय तस्दीक जी. हार्दिक बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 3, 2016 at 7:44pm

मोहतरमा प्राची सिंह साहिबा , हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 3, 2016 at 3:25pm

रंगों के माध्यम से विकृत व्यस्था और रंगों को धर्मों से जोड़ देने वाली सोच पर कटाक्ष हुआ है..

लेकिन मोहब्बत का रंग सफ़ेद मुस्कान में नज़र नहीं आया वहां तो कुछ कुटिल छवि उभरी है 

प्रस्तुति सशक्त हुई है 

हार्दिक बधाई

Comment by Manoj kumar Ahsaas on February 2, 2016 at 8:59pm
वाह कबीर साहब
सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 2, 2016 at 8:42pm

मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,  सफ़ेद सूरज की किरण जो खुद सात रंगों से बनी है , मुहब्बत का रंग बन कर सारी दुनिया को फ़ायदा पहुंचा रही है / तो असली रंग लाल , पीला और नीला ऐसा क्यों नहीं कर सकते। .... यह सिर्फ तसव्वुर पर बेस है। ..... शुक्रिया

Comment by Samar kabeer on February 1, 2016 at 10:37pm
फिर क्या हुआ ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन के भावों पर आपकी स्नेह बरखा का दिल से आभार। आपके सुझाव का दिल से…"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय  अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " जी भावों पर आपकी मनोहारी प्रशंसा से सृजन सार्थक…"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी भावों पर आपकी मनोहारी प्रशंसा से सृजन सार्थक हुआ,…"
9 hours ago
Pragyat Agarwal left a comment for Pragyat Agarwal
"धन्यवाद जी"
9 hours ago
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"मोहतरम मैने गूगल भी किया तब ख़्याल लिखा.// आपको यही बताना चाहता हूँ कि गूगल ने कई लोगों की नैया…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"मैंने रूपम जी का मूल शैर नहीं पढ़ा,मैं सिर्फ़ ये अर्ज़ कर रहा हूँ कि ज़ख़्म सिये जाते हैं,इसमें ज़ख़्म का…"
11 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय समर कबीर साहबआदाबग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार. शब्दों के चयन में मैं बहुत…"
11 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब, आदाब। जी हाँ मैंने डाॅक्टरों को ज़ख़्मों को सीते हुए देखा है। बल्कि एक…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उम्मीद क्या करना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार । इंगित मिसरे में आपका कथन…"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गंगादशहरा पर कुछ दोहे
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । दोहों पर उपस्थिति से मान बढ़ाने के लिए आभार ।"
13 hours ago
Anvita commented on Anvita's blog post "लोग"
"आदरणीय कबीर साहब ।रचना की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।सादर अन्विता"
13 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय सुशील सरना जी, आदाब। "अधूरे अफ़साने" ख़़ू़ूबसूरत रचना के लिए आपको बहुत बधाईयाँ।…"
14 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service