For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

स्वतन्त्र नदी ........इंतज़ार

बरसाती नदी सी क्यूँ हो तुम ?
किसी और की मनोदशा
निर्धारित करती है तुम्हारा बहाव
किसी की मेहेरबानी से चल पड़ती हो
तो कभी सूख जाती हो
कभी सोचा है
मेरा हाल उस मछली की तरहाँ होता है
जो बचे-खुचे कीचड़ में
तड़पती है सिर्फ़ भीगने के लिये
जिंदा रहने के लिये
और जब सैलाब आता है
तो बहुत दूर बह जाती है बेकाबू
तुम कब एक प्रवाह में स्वतन्त्र बहोगी
नदी हो... पहाड़ों से टक्कर ले जीत चुकी हो
अब कोई कैसे स्वार्थ के बांध बना
रोक सकता है तुम्हारा प्रवाह
हे प्रिये ....तोड़ कर सब बंधन
बह निकलो एक स्वतन्त्र
कल-कल करती नदी सी !!

************************************************

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 637

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 16, 2015 at 11:55pm

टंकण त्रुटियाँ ठीक कर लें, आदरणीय
यथा,
किसी और की मनोदशा
निर्धारित करता है तुम्हारा बहाव

इसी तरह तरहाँ  को तरह कर लेना उचित प्रतीत होता है.

बाकी, कविता की भावदशा आश्वस्तिकारी है.  शुभ-शुभ

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 14, 2015 at 3:36pm

आदरणीया savitamishra जी हार्दिक आभार ...सादर 

Comment by savitamishra on July 14, 2015 at 2:46pm

बहुत खूब

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 14, 2015 at 9:23am

आज कल थोड़ा कम आना हो पा रहा है क्षमा चाहता हूँ ....आप का होंसला अफज़ाई के लिये शुक्रिया ....एवं आभार 

आदरणीय  vijay nikore जी 

आदरणीया Pari M Shlok जी 

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी 

एवं आदरणीय shree suneel जी 

आप के प्रोत्साहन से साहस बना रहता है ....सादर 

Comment by shree suneel on July 12, 2015 at 9:40am
व्वाहह!... व्वाहह!!..बहुत सुन्दर कविता दी है आपने आदरणीय. पहली पंक्ति ने हीं असर किया. 'स्त्री को उसके स्वतंत्र अस्तित्व का बोध कराती बहुत हीं भावपूर्ण कविता हुई. हार्दिक बधाई आपको.
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 10, 2015 at 9:29am

bhavpoorn , sundar .

Comment by Pari M Shlok on July 9, 2015 at 3:19pm
अद्भुत संवेदना से भरी अभिव्यक्ति......... लाज़वाब
Comment by vijay nikore on July 8, 2015 at 9:42am

   रचना के भाव में बहता ही गया। सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई।

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 8, 2015 at 9:34am

आदरणीय vinaya kumar singh जी आप का धन्यवाद .....सादर 

Comment by विनय कुमार on July 7, 2015 at 6:11pm

वाह , बहुत उम्दा कविता | एक नारी के लिए लिखी गयी पंक्तियाँ अपना प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह सफल हैं | बधाई इस रचना के लिए आदरणीय..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
11 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service