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ग़ज़ल -नूर: मेहंदी उनकी बहुत रची होगी.

२१२२/१२१२/२२ (११२)
लोग समझे कि शाइरी होगी
बात तो सिर्फ़ आप की होगी
.  
रोज़ साहिल पे आ के रुकती है
शाम की कोई बे-बसी होगी
.
तेरे जाने का ग़म रहा मुझ को
ग़म को कितनी खुशी हुई होगी.
.
अपने जादू से जीत लेती है
ये कज़ा भी कोई परी होगी.
.
ले चलूँ बेटी के लिए गुडिया
मुँह फुलाए वो अनमनी होगी.
.
मेरे दर पे ख़ुशी है आने को
आती होगी!! कहीं रुकी होगी.
.
दर्द की चींटियाँ लिपटती हैं

दिल में यादों की चाशनी होगी.
.
जिस गली में ठिठक रहे हैं क़दम
वो गली यार की गली होगी.
.
इश्क़ दुनिया से तो छुपाए रखा
फिर भी कोई नज़र लगी होगी 
.
आप की बात मान लेता हूँ
आप कहते हैं तो सही होगी.
.
शह्र लड़ने लगा है जिस पे तमाम 
बात पहले वो आपसी होगी.
.
हश्र पर साथ कुछ नहीं होगा
सिर्फ़ कर्मों की पोटली होगी.
.
‘नूर’ आँखों से सुर्खियाँ लेकर
मेहंदी उनकी बहुत रची होगी.
.
निलेश "नूर"
मौलिक / अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on January 2, 2024 at 1:35pm

धन्यवाद आ. सौरभ सर ..
पता नहीं आपकी टिप्पणी पर धन्यवाद ज्ञापित करना कैसे रह गया ..
खैर.. ९ साल कोई बड़ा फासला नहीं होता :))
आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 6, 2015 at 1:43am

इस कमाल को बचाये रखियेगा. वर्ना खोनेको बहुत कुछ है..
पूरी ग़ज़ल ही कमाल की हुई है लेकिन निम्न अश’आर तो साहब दुलार आकार पाये हैं. इनको विशेष तौर पर उद्धृत न करना इनकी मुलामीयत से आँख चुराना होगा.
 
दर्द की चींटियाँ लिपटती हैं
दिल में यादों की चाशनी होगी......  वाह !

हश्र पर साथ कुछ नहीं होगा
सिर्फ़ कर्मों की पोटली होगी..........   कर्मफल सिद्धांत को कितनी खूबसूरती शब्द मिले हैं ! दिल जीत ले गये भाई..  
.
‘नूर’ आँखों से सुर्खियाँ लेकर
मेहंदी उनकी बहुत रची होगी. ........... मक्ते का तो कहना क्या है ? कमाल की सोच है !

आदाब

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 28, 2015 at 10:40am

शुक्रिया आ. मिथिलेश जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 28, 2015 at 2:40am

वाह वाह वाह नीलेश जी 

शानदार ग़ज़ल 

दाद दाद दाद 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 19, 2015 at 12:10pm

शुक्रिया आ. दिनेश भाई 

Comment by दिनेश कुमार on June 19, 2015 at 8:20am

कमाल ...

Comment by दिनेश कुमार on June 19, 2015 at 8:18am

क्या बात है ...वाह वाह बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही है आ. निलेश भाई जी। हार्दिक दाद व मुबारकबाद

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 19, 2015 at 7:42am

शुक्रिया आ. महर्षि जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 19, 2015 at 7:41am

शुक्रिया आ. वीनस जी 

Comment by maharshi tripathi on June 18, 2015 at 7:38pm

वाह !!प्रत्येक मिसरा काबिले तारीफ है आ.Nilesh Shevgaonkar जी |

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