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बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....

१ २ २ २ १२ १ २२२
बड़ी मुश्किल उसे मनाया है ॥
बहुत कुछ दांव पे लगाया है ॥
किसे कहते कि बेवफा है वो ,
हँसा हम पे जिसे बताया है ॥
बसा दिल-ओ-दिमाग में वो ही ,
अचानक सामने जो आया है ॥
लगे ऐसा हमें खुदा ने उसे ,
हमारे के लिए बनाया है ॥
हुआ है एहसास जन्नत का ,
जो माँ ने गोद में सुलाया है ॥
कहाँ होशो-हवास की बातें ,
किसी पे जब शबाब आया है ॥
लगे है वो पवित्र गंगा सा ,
करिंदा जो पसीने से नहाया है ॥
मौलिक /अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 10, 2015 at 3:58pm

आदरणीय नजील जी ..आपसे पहली बार परिचय हुआ ...आपके प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनाएं सादर 

Comment by Nazeel on April 9, 2015 at 11:48am

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी  आपका बहुत बहुत धन्यावाद।  भाई जी  मैं  गुनीजनो   की सलाह पर  ही  ध्यान  दे रहा हूँ । आपका हार्दिक आभार । 

Comment by Nazeel on April 9, 2015 at 11:42am

आदरणीय डॉ.  विजय  शंकर जी  हौसला देने के लिए  हार्दिक आभार। । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2015 at 11:37am

आदरणीय नज़ील भाई , अच्छी गज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ । जानकारों की सलाहों का खयाल कीजियेगा ॥

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 9, 2015 at 11:30am
बहुत ही खूबसूरत , बहुत बहुत बधाई , सादर।
Comment by Nazeel on April 9, 2015 at 11:12am

आदरणीय मिथिलेश भाई जी बहुत बहुत धन्यवाद  । आप जैसे गुणीजनों  की की सोहबत  में बहुत कुछ  सीखने को  मिलता है।  जो   शेयर  बेबह्र है उसको सुधारने  की कोशिश करता हूँ ।  हार्दिक आभार । 

Comment by Nazeel on April 9, 2015 at 11:06am
आदरणीया राजेश कुमारी जी आपका तहे दिल से शुक्रिया. आपने रचना पर गौर फ़रमाया गलती सुधारने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by Nazeel on April 9, 2015 at 11:04am
आदरणीय भाई कृष्णा मिश्रा जी आपका हार्दिक आभार …मित्रवत सुझाव देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यावाद , देखता हूँ किन शायरों में ध्यान की दरकार है। हार्दिक धन्यावाद

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 8, 2015 at 11:44pm

आदरणीय नाज़िल जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, हार्दिक बधाई .... शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाएं

 मैं भी आदरणीया राजेश दीदी से सहमत हूँ  बड़ी मुश्किल कर लीजिये 

ये शेर बेबह्र हो रहा है -

लगे है वो पवित्र गंगा सा ,
करिंदा जो पसीने से नहाया है ॥....... पसीने से कोई नहाया है / पसीने से कि जो नहाया है (बह्र-१२२ २ १२ १२२ २)

सादर 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 8, 2015 at 10:54pm

मतला अच्छा है पर बड़ी मुश्किल कर लीजिये

हुआ है एहसास जन्नत का , 
जो माँ ने गोद में सुलाया है ॥ ---सुन्दर शेर है 

लगे ऐसा हमें खुदा ने उसे ,
हमारे के लिए बनाया है ॥ ----हमारे लिए होता है हमारे के लिए नहीं ---हमारे वास्ते बनाया है कर सकते हैं 

कुछ वक़्त और मांगती है ग़ज़ल 

अंतिम शेर में ये करिंदा क्या है ? मैं समझ नहीं पाई 

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