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एक मुठ्ठी की भांति (तांका)

क्यों भूले तुम ?
अपनी मातृभाषा
माॅं का आॅंचल
कभी खोटा होता है ?
खोटी तेरी किस्मत ।

2.
दूर के ढोल
मधुर लगे बोल
नभ में सूर्य
धरातल से छोटा
बहुत सुहाना है ।

3.
आतंकवाद
धार्मिक कट्टरता
नही सीखाता
बाइबिल कुरान
हिन्द का गीता पुराण ।

4.
स्वीकार करें
दूसरो का सम्मान
क्यों थोपते हो ?
पंथ धर्म विचार
सभी खुद नेक हैं ।

5.
गरज रहा
आई.एस.आई.ई
सचेत रहे
हिन्दू मुस्लिम एक
एक मुठ्ठी की भांति ।
............................................
मौलिक अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 17, 2014 at 8:39pm

बहुत बढ़िया आदरणीय रमेश जी भाव अच्छे लगे शिल्प के बारे में तो मुझे ज्ञान नहीं है इसलिये कुछ कह नहीं सकता। इस कोशिश के लिये बधाई हो

Comment by Alok Mittal on December 17, 2014 at 11:20am

बहुत सुंदर प्रस्तुति आपकी ....

आतंकवाद
धार्मिक कट्टरता
नही सीखाता
बाइबिल कुरान
हिन्द का गीता पुराण ।..बहुत सुंदर लिखा है

Comment by Hari Prakash Dubey on December 16, 2014 at 11:30pm

सुन्दर प्रस्तुति रमेश भाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 16, 2014 at 11:17pm

आदरणीय  रमेश कुमार चौहान  जी इस विधा के सम्बन्ध में इसी मंच पर पढ़ा है बहुत ज्यादा नहीं समझ पाया हूँ फिर भी ये पंक्तियाँ विशेष लगी 

स्वीकार करें
दूसरो का सम्मान
क्यों थोपते हो ?
पंथ धर्म विचार
सभी खुद नेक हैं ।

सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 16, 2014 at 7:10pm

बढ़िया प्रस्तुति रमेश जी,एक निवेदन करना चाहूँगी ..पोस्ट करने से पहले  शब्दों की मात्राओं की त्रुटियाँ दूर कर लिया कीजिये आश्वस्त होने पर पोस्ट कीजिये ...कुछ शब्दों पर गौर कीजिये ---- भुले=भूले ....माँ आँचल,....नहीं सिखाता .....बाइबिल.... 

हिन्दू मुस्लिम एक
एक मुठ्ठी के भांति ।---
एक मुठ्ठी की  भांति ।

आप इतना अच्छा लिखते हैं व्याकरण की ओर थोडा सतर्क रहें तो रचना में चार चाँद लग जाते हैं ,बहरहाल सुन्दर ताकों के लिए बहुत बहुत बधाई   

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 16, 2014 at 12:04pm

रमेश भाई

अच्छी प्रस्तुति है i

Comment by Shyam Narain Verma on December 16, 2014 at 11:42am

बहुत  ही सुन्दर प्रस्तुति  //हार्दिक बधाई आपको 

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