For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तू मेरी मोहब्बत है,तू मेरी इबादत है।

तू मेरी मोहब्बत है,तू मेरी इबादत है।
कैसे मैं तुझसे कहूँ,मुझे तेरी ज़रुरत है।

हरदम मैं लूँ नाम तेरा,चाहे शाम हो या सवेरा,
ये तुझको भी है मालूम, मुझे तेरी आदत है।

पाने को न कुछ पाया,जो तुझको नहीं पाया,
फिर चाहे जहाँ भर की,मेरे पास ये दौलत है।

ये साँस भी छिन जाये,जो पास न तू आये,
आकर आगोश में ले ले,बस इतनी हसरत है।

तुझसे ज़िंदगानी मेरी,तुझसे ही कहानी मेरी,
तेरे बिन जीना कैसा,कह दे,मरने की इज़ाज़त है।
 
'सावित्री राठौर'
[मौलिक एवं अप्रकाशित]

Views: 422

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 30, 2014 at 7:18pm

प्रेम में भाव प्राण समर्पिता के हृदय के उदगार बहुत कोमलता से व्यक्त हुए हैं 

मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति...

हार्दिक बधाई आ० सावित्री जी 

Comment by Savitri Rathore on June 24, 2014 at 4:41pm

आदरणीय गिरिराज जी और जवाहर जी,आपके द्वारा की गयी सराहना एवं उत्साहवर्धन हेतु मैं आभारी हूँ और अपेक्षित सुधार हेतु प्रयासरत हूँ।

Comment by Savitri Rathore on June 24, 2014 at 4:37pm

आदरणीया राजेश जी,सादर नमस्कार ! मार्गदर्शन हेतु हृदय सेआपकी आभारी हूँ,किन्तु व्यस्तता के कारण अभी ग़ज़ल समूह की कक्षा पर ध्यान नहीं दे पाऊँगी,पर समय मिलते ही आपके निर्देशानुसार ध्यान देकर अपनी ग़ज़ल रचना में  अपेक्षित सुधार अवश्य करूंगी। आपके अमूल्य सुझाव हेतु आभारी हूँ।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 22, 2014 at 9:35pm

तुझसे ज़िंदगानी मेरी,तुझसे ही कहानी मेरी,
तेरे बिन जीना कैसा,कह दे,मरने की इज़ाज़त है। 

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 22, 2014 at 8:40pm
आदरणीया सावित्री जी , सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये बधाई ॥ मै भी आदरणीया राजेश जी के विचारों से सहमत हूँ ॥

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 22, 2014 at 5:16pm

सावित्री जी बहुत भाव पूर्ण लिखा है आपने ,इन्ही भावों को सही मात्राओं और बहर में ढाल कर आप बहुत अच्छी ग़ज़ल लिख सकती हैं ग़ज़ल समूह में आप सब जानकारी हासिल कर सकती हैं बहरहाल बहुत -बहुत बधाई इस सुन्दर अभिव्यक्ति पर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"आ. बृजेश जी,मुद्दा नहीं मुद्दआ होता है अत: आप मतला पुन: कहें . मैं भी मुँह में ज़बान रखता…"
22 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"तक़ाज़ा (लघुकथा) : दफ़्तर में काफ़ी काम निबटाने के बाद लिपिक बड़े बाबू दूसरे कक्ष में पहुंचे थे, तो कुछ…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"वाह। बहुत ही उम्दा लिखा है आपने। शायद इस मासिक गोष्ठी में हम पहली बार आपकी रचना पढ़ रहे हैं। हार्दिक…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"आदाब। इस गोष्ठी का आकर्षण बढ़ाती हुई रचना के साथ  इसका आग़ाज़करने हेतु बहुत-बहुत मुबारकबाद…"
3 hours ago
Samarth dev replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"दोस्त 1 :तुझे तो कोई पुराने हिन्दी गाने सुनने वाली पसन्द होगी क्योकि खुद दिन भर सुनता है…"
10 hours ago
Rakshita Singh left a comment for Samarth dev
"Welcome !"
10 hours ago
Samarth dev is now a member of Open Books Online
10 hours ago
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"उस रोज़ तुम पर हाथ उठाते-उठाते, मैं रुक गया। अचानक ज़हन में उठा सुधा का ख़याल, मुझे खींच ले गया…"
10 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"स्वागतम"
10 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बन्धनहीन जीवन :. . . .
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार "
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"परम आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम सर सृजन पर आपकी विस्तृत समीक्षात्मक टिप्पणी का दिल से…"
13 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service