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गुरु चरणों में समर्पित दोहावली........ डॉ० प्राची

सद्गुरु मणि अनमोल है, जीवन दे चमकाय 

पारस तो कुंदन करे, गुरु पारस कर जाय //१//

गुरु बंधन से मुक्त कर, ब्रह्म मार्ग दिखलाय

छद्म समझिए रूप वह, जो बंधन जकड़ाय //२//

गुरु की कृपा अनंत है, गुरु का प्रेम अथाह 

श्रद्धानत जो मन हुआ, तद्क्षण पाई राह //३// 

भटका गुरु-गुरु खोजता, गुरु मिलया नहिं कोय 

ज्ञान पिपासा जब जगी, प्रकट स्वतः गुरु होय //४//

गुरु का आदि न अंत है, गुरु नहिं केवल गात्र 

एक अनश्वर सत्व है, पाए बस सद्पात्र //५//

मौलिक और अप्रकाशित 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 17, 2013 at 2:36pm

दोहावली की सराहना के लिए आभार प्रिय रामशिरोमणि पाठक जी 

Comment by ram shiromani pathak on September 17, 2013 at 12:17pm

बहुत ही उत्कृष्ट दोहे आदरणीया प्राची जी //हार्दिक बधाई आपको //सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 12, 2013 at 2:52pm

आदरणीय सौरभ जी 

दोहावली के भावों पर और सन्निहित अर्थ की सकारात्मकता पर आपका अनुमोदन बहुत महत्वपूर्ण है, उत्साहवर्धक है, आपकी आभारी हूँ आदरणीय.

भाषिक रूप से आँचलिक शब्दों को बहुत सहजता से नहीं लिख पाती मैं, और दोहावली में सिर्फ कुछ जगह आंचलिकता आरोपित सी शायद इसी लिए लग रही हो..  अवश्य ही प्रयत्न करके इसे संतुलित करती हूँ...

सादर धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 12, 2013 at 10:43am

दोहावलि के भावों की उत्कृष्टता पर कहना ही क्या ! पहला दोहा ही ध्यान खींच लेता है. किन्तु भाषिक रूप से काश आपने छंदों को पूर्ण आंचलिक रहने दिया होता.

आपकी सकारात्मक समझ दोहों के माध्यम से पूरी तरह से निखर कर आयी है. हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीया.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 12, 2013 at 10:32am

दोहावली पर प्रोत्साहित करते अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार प्रिय महिमा जी, आ० विजय जी, प्रिय अरुण जी, संदीप जी, वंदना जी, आदरणीया राजेश जी..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 12, 2013 at 10:31am

आदरणीया मीना जी 

दोहावली पर उत्साहवर्धक सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार 

Comment by vandana on September 7, 2013 at 7:06am

पारस तो कुंदन करे, गुरु पारस कर जाय 

वाह आदरणीया डॉ.साहिबा शानदार दोहे 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 6, 2013 at 6:19pm

 वाह वाह आदरणीया डॉ प्राची जी ...............इस उत्कृष्ट दोहावली के लिए बधाई हो 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 6, 2013 at 6:07pm

गुरु दिवस पर सार्थक सुन्दर दोहे बहुत बहुत बधाई प्रिय प्राची जी |

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 6, 2013 at 2:11pm

वाह दीदी वाह अप्रितम अप्रितम सुन्दर दोहावली रची है आपने पढ़कर आनंद आ गया एक एक दोहा हृदयस्पर्शी बन पड़ा है हृदयतल से बधाई स्वीकारें दीदी.

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