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वाकई मन को छू गयी ..वाकई हमारी तमाम सोचें बेबुनियाद हैं ..ढेरों बधाई
लघु कथा का संदेश अच्छा है। बधाई।
सादर,
विजय निकोर
"जाति धर्म अच्छे बुरे का निर्धारण नहीं करते।"
ji बृजेश नीरज ji...
vandana ji
a a b h a r ...
जाति धर्म अच्छे बुरे का निर्धारण नहीं करते। यह सिर्फ व्यक्ति की मानसिकता और प्रवृत्तियों द्वारा ही निर्धारित होता है कि व्यक्ति अच्छा है या बुरा।
बहुत अच्छा संदेश देती आपकी यह कथा अत्यंत सशक्त है।
आपको हार्दिक बधाई!
बेहतरीन सन्देश आदरणीय अविनाश जी
Laxman Prasad Ladiwala sir.....आभार !
"उस थप्पड़ की गूँज दूर तक सुनाइ दे रही है...."
शुभ्रांशु पाण्डेय जी /आपका मंतव्य सर आँखों पे
"....उस कृत्रिम अवधारणा का सीधा काट भी जीसका निर्माण समाज में तीव्रता से किया जा रहा है अपने-अपने क्षुद्र हितों के लिए...."
शुक्रिया विजय मिश्र जी ..
"अभी भी शिल्प को काफी और कसा जा सकता है, जिस पर विशेषज्ञ ही अपनी महत्वपूर्ण राय दे सबको सीखने का अवसर प्रदान कर सकते हैं.".....जी! ह्रदय से आभार डॉ प्राची जी।
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