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मेरे पागल दिल से पूछो [नज़्म]

तुमसे बिछड़ के क्यों जीता हूँ ,
मेरे पागल दिल से पूछो ।
दर्द के आंसू क्यों पीता हूँ ,
मेरे पागल दिल से पूछो ।

तनहाई के दौर बहुत हैं ।

दर्द मिले इस तौर बहुत हैं ।
ये न समझना एक तुम्ही हो,
दिल के साथी और बहुत हैं ।

टूटे सपने क्यों सींता हूँ ,
मेरे पागल दिल से पूछो ।

माना तुमसे दूर बहुत हैं ।
हम दिल से मजबूर बहुत हैं ।
प्यार की रस्मे कैसे निभायें,

दुनिया के दस्तूर बहुत हैं ।

किन हालातों से बीता हूँ ,

मेरे पागल दिल से पूछो ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज

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Comment

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Comment by annapurna bajpai on August 24, 2013 at 11:18pm

आदरणीय नीरज मिश्रा जी प्रभावित करती पंक्तियाँ उम्दा प्रस्तुति के लिए बधाई ।

Comment by vijay nikore on August 24, 2013 at 7:50pm

सुन्दर भावाभिव्यक्ति।

बधाई आदरणीय नीरज जी। सादर,

विजय निकोर

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 24, 2013 at 12:28pm

नीरज भाई इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें किन्तु अब ईच्छा कुछ और भी पढ़ने की है अपेक्षा बढ़ गई है आपसे भाई.

Comment by बृजेश नीरज on August 24, 2013 at 12:19pm

आप शायद ऐसी ही वाहवाही पसंद करते हैं, जैसी यहां हो रही है।
पहले तो आप यह बतायें कि नज़्म होती क्या है?
आपके साथ एक मुश्किल है कि आप व्याकरण और नियमों का पालन नहीं करना चाहते लेकिन अपनी रचना को गज़ल, नज़्म आदि आदि नाम देना चाहते हैं और कोई टोक दे तो आप बिदक जाएंगे। क्यों भाई, यह नज़्म क्यों और कैसे है? पहले इस पर विचार किया जाना चाहिए।
आदरणीय, आपका मार्गदर्शन इस बिंदु पर चाहिए।

Comment by विजय मिश्र on August 23, 2013 at 3:58pm
मंत्रमुग्ध सा पढ़ गया -मेरे पागल दिल से पूछो | मनोरम काव्य रचना ,बधाई नीरजजी
Comment by Lata tejeswar on August 23, 2013 at 12:19pm

भाई बहुत ही सुन्दर

Comment by ram shiromani pathak on August 22, 2013 at 9:31pm

वाह वाह क्या कहने  भाई बहुत ही सुन्दर  //बहुत बहुत बधाई आपको //सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 22, 2013 at 8:25pm

नीरज भाई लाजवाब नज़्म , सुन्दर भाव , दिली बधाई !!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 22, 2013 at 8:06pm

माना तुमसे दूर बहुत हैं ।
हम दिल से मजबूर बहुत हैं ।
प्यार की रस्मे कैसे निभायें,

दुनिया के दस्तूर बहुत हैं ।.........सच! बहुत विवशता है, जमाने के दस्तूरों से

आदरणीय नीरज भाई, कमाल की नज्म हुयी, बहुत बहुत बधाई

Comment by वेदिका on August 22, 2013 at 7:25pm

बहुत ही सुंदर नज्म, दिल के भावों को बखूबी बयां करती हुयी!!

बधाई आ० नीरज जी! 

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