For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक लड़की पगली सी

एक लड़की पगली सी -
खड़ी रहती हर सुबह छ्त पर अकेली,
कभी बालों को सँवारती,
होंठों में कुछ गुनगुनाती रहती.

सूरज जब दहलीज पर आता
दे जाता आभा रेशम सी,
सुनहरी किरणों से नहाती औ’
खुशियों से झूम झूम जाती.

एक लड़की भोली सी -
टहलती हुई छ्त पर भरी दोपहर
बालों को फूलों से सजाती,
पवन का झोंका आता ठहर-ठहर
डोल जाती वह कोमलांगिनी
शर्माती, हुई जाती कुछ सिहर-सिहर.

हँसती, कभी मुसकाती एक लड़की -
भोला बचपन गया, कब आया यौवन
समझ न पायी वह दीवानी,
फूल सी ज़िंदगी -
पर ,
मन में कितनी उलझन !!

एक दिन उमड़ता घुमड़ता,
छ्त पर आया
मटमैला, दिलफेंक एक आवारा बादल -
प्यार का मधुर गीत गुनगुनाता,
मोहित किया,
प्रेम की बरसात हुई,
भीगा उसका आँचल.

न सोचा ना समझा –
सर्वस्व लुटाया.
चल दी अनजान सफ़र पर, सब कुछ भुला
सूना छ्त , सूनी दोपहर, सूनी गली
रवि, पवन सब देखते रहे,
क्या कहें भला ?

एक लड़की –
अनजान देश में ठगी सी,
जिसे दिल दिया उसीने किया सौदा ;
कभी इधर कभी उधर भागती सी,
तन का ग्रास बनी
कभी इसका कभी उसका.

एक शाम -
एक लड़की सयानी,
समुद्र किनारे सैलानियों का दिल बहलाती.
देख सूरज शर्म से सागर में डूब जाता,
हवा तेज़ बहती ,
लहरें भी रहती भागती.

अंधेरी रात -
एक लड़की थकी सी,
सूने घर में चंद साँसें गिन रही;
चहुँ-ओर था अंधेरा ही अंधेरा.
इंतज़ार, सूरज के दहलीज पर आने का
फिर कब हो नया सबेरा.

किसका था दोष ?
लड़की का ?
या उसके यौवन का ?
एक फूल सा जीवन,
सपनों की टोकरी,
टूटकर शून्य में बिखर गया.

सूने घर में -
एक लड़की अनजानी,
मिट गयी कोमल कनक सी काया;
धरती से आकाश तक
उठा हाहाकार,
पर -
निष्ठुर समाज
चलता रहा अपने ही ढर्रे पर.

Views: 403

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by coontee mukerji on May 1, 2013 at 7:57pm

मैं आप सभी लोगों को धन्यवाद समर्पण करती हूँ जो अपने कीमती समय निकाल कर मेरी रचना का मान दिया .......एक सुंदर देश   चारों ओर हरा नीला समुद्र क्षितीज तक लहराता हुआ...जहाँ  प्रकृति  अपनी

सुनहरे घड़े से सौंदर्य उड़लते नहीं अघाती .....वहाँ  दुनिया भर से आये प्राकृतिक सौंदर्य प्रेमी अपनी लोलुपता  से बाज़ नहीं आते हैं ......आधुनिकता के शिखर पर पहुँचते  छोटा सा देश इतनी बड़ी बात समझ नहीं पाते ......कभी कभी  आधुनिकता का दोरूपयोग  एक

समाज का  , एक देश का अभिशाप बन जाता है......सादर  /  कुंती .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 30, 2013 at 8:05pm

आदरणीय कुंती जी 

मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति 

चल दी अनजान सफ़र पर, सब कुछ भुला
सूना छ्त , सूनी दोपहर, सूनी गली
रवि, पवन सब देखते रहे, 
क्या कहें भला ?

शुभ कामनाएं 

Comment by vijay nikore on April 29, 2013 at 6:09pm

आदरणीया कुंती जी,

 

बहुत श्लाघनीय कार्य किया है आपने !

कमाल की प्रस्तुति ! 

संजों कर रखने लायक है !

अनन्य सराहना के साथ,

 

सादर और सस्नेह,

विजय निकोर

Comment by akhilesh mishra on April 29, 2013 at 3:19pm

bahut khub badhai swikare .

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 29, 2013 at 3:10pm

एक लड़की का यौवन, उसका अल्लह्डपन, उसके सपने कब टूट कर बिखर जाते है, काल के ग्रास में समा जाते है 

नारी मन की इस वेदना को अंतस से अहसास कर लिखी गयी रचना में नारी के शोषण पर गहराई से कलम को

डुबोया है आपने आदरणीया कुंती मुखर्जी | इसमें जहां समाज को कोसा है वही स्वछंद नारी को सोच समझ कर

प्यार के डग भरने की नसीहत भी है, पर समझ अपने अपनी | बहुत खूब बधाई  

Comment by राजेश 'मृदु' on April 29, 2013 at 2:10pm

प्‍यार में बिना सोचे-समझे सर्वस्‍व लुटाने का अंजाम यही होता है यह उसे सीखना पड़ेगा और सभी लड़कियों को सीखना पड़ेगा कि प्‍यार को कब तक अंधा ही रहने दोगे, उसे आंखों वाला बनाने की जरुरत है

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 28, 2013 at 9:13am

आदरणीया सादर, तीन भिन्न आयामों पर नारी छवि को सुन्दरता से प्रस्तुत किया है.रचना बताती है किस तरह नारी  शोषण के तल तक पहुँच गयी.बहुत खूब.

Comment by Usha Taneja on April 27, 2013 at 10:32pm

आदरणीया 

नारी की स्थिति का इस तरह से जो चित्रण आपने किया है, तारीफ के काबिल है. 'रवि, पवन सब देखते रहे,' काश वे रोक सकते .......

''सपनों की टोकरी,
टूटकर शून्य में बिखर गया.

सूने घर में -.......''

इस दर्द को...

सादर 

 

Comment by manoj shukla on April 27, 2013 at 9:01pm
बहुत सुन्दर रचना ..... आपने उस लडकी को माध्यम बना कर नारी के प्रति हो रहे दुर्व्यवहार का सुन्दर चित्रण किया है....आदर्णीया बधाई स्वीकार करें
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 27, 2013 at 7:48pm

आ0  कुन्ती जी,  अतिसुन्दर प्रस्तुति।  हां, एक सांझ सजीली  फिर अरूणिमा में धीरे-धीरे स्याह हुई।  किसका दोष है? वह सूरज जो छोड़ गया या फिर यह तिमिर जो भयावह ढंग से डस गया।  हार्दिक बधाई स्वीकारें।   सादर,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहब"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"सहीह शब्द "बेवज्ह"221 है,रदीफ़ "बेसबब" कर सकते हैं ।"
11 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहब जी मैं रदीफ को बदलकर बेवजह कर दूंगा।"
12 hours ago
रणवीर सिंह 'अनुपम' commented on Hariom Shrivastava's blog post योग छंद
"आदरणीय सुंदर सृजन। चरण 8 - में लय भंग है। कारण 5वीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है, जो नहीं होना…"
12 hours ago
रणवीर सिंह 'अनुपम' updated their profile
13 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post 'तुरंत' के दोहे ईद पर (१०६ )
"भाई रणवीर सिंह 'अनुपम'  जी ,  इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार एवं…"
13 hours ago
रणवीर सिंह 'अनुपम' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post 'तुरंत' के दोहे ईद पर (१०६ )
"बहुत सुंदर दोहे।"
13 hours ago
Profile Iconरणवीर सिंह 'अनुपम' and Ananya Dixit joined Open Books Online
13 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"//जनाब अमीरुद्दीन खान साहब के अनुसार खामखा रदीफ में ले सकते हैं?// नहीं ले सकते,आपको रदीफ़ बदलना…"
13 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"//जानना चाहता हूँ कि क्या लफ़्ज़ ख़ामख़ा लेना दुरुस्त है या नहीं अगर दुरुस्त है तो क्या लफ़्ज़…"
13 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ईद कैसी आई है!
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से…"
14 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब आदाब मेरे ब्लॉग की सारी ग़ज़लों पर आपकी इस्लाह और मार्ग दर्शन मिला है. ये ग़ज़ल…"
14 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service