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आधी अधूरी सी ये ज़िन्दगी

तमन्नाओं से भरी हुई  

जिज्ञासाओ को छुती हुई 

पल की खबर नही 

ठूंठ की तरह खड़ी हुई

आज का पता नही

कल का ठिकाना नही

चल रही बेबाक सी 

किसी का खौफ नही

बनती बिगड़ती फिर सवंरती

कैसी खोखली ये ज़िन्दगी 

आगे दौड़ने की होड़ में रह गई पीछे 

ताश के पत्तों सी बिखरी हुई 

आधी अधूरी सी ये ज़िन्दगी 

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Comment

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Comment by ram shiromani pathak on April 15, 2013 at 3:06pm

आ0 आरती जी, बहुत ही सुंदर लिखा है आपने हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 15, 2013 at 1:56pm

आदरणीया बहुत ही सुंदर लिखा है आपने
कम शब्दों मे सटीक तथ्य
बधाई हो

Comment by बसंत नेमा on April 15, 2013 at 12:34pm

बहुत खूब ..बधाई  . वाकई  जिनते लोग उतने जिन्दगी के फलसफा है ...हर इंसान का  जीने का बस अन्दाज जुदा है 


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Comment by rajesh kumari on April 15, 2013 at 11:24am

सुन्दर भावाभिव्यक्ति आरती जी बधाई आपको |

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 15, 2013 at 10:24am

आ0 आरती तिवारी जी,  प्रणाम!   .. सुन्दर..! बधाई स्वीकारें।  सादर,

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