For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मत्तगयन्द संग होरी.

लाल ललाम ललाट लिए,

ललि लागत है ललना अति गोरी,

 

      गाल गुलाल गुबार गुमा,

      गम गौण गिनावत है यह होरी,

 

            नाच नचावत नाम नरे,

            नभ नील बजावत बांसुरि ओरी,

 

                   तान तनी तन तार दिया,

                   तब भीज गई मम चूनर कोरी//

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Views: 192

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by राजेश 'मृदु' on March 25, 2013 at 12:38pm

क्‍या बात है आदरणीय, अनुप्रास की छटा तो देखते ही बनती है, सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on March 25, 2013 at 8:37am

भाई राम शिरोमणि जी, आदरणीय डॉ. अजय खरे साहब, आ. जवाहर जी भाई आदरणीया वन्दना तिवारी जी, आ. केवल प्रसाद जी आप सबकी प्रतिक्रियाएं मेरा मनोबल बढ़ा रही है. आप सभी का हृदयातल से आभार.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 24, 2013 at 12:36pm

आदरणीय,  अशोक कुमार रक्ताले जी, बहुत सुन्दर! हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Vindu Babu on March 24, 2013 at 10:21am
आदरेय रक्ताले महोदय सादर नमन्।
आपकी कलापूर्ण रचना ने शब्दहीन कर दिया।आपकी छोटी सी रचना भी बहुत से साहित्यित गुरों का दर्शन करा रही है।
सादर बधाई स्वीकारें।
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 23, 2013 at 8:09pm

आदरणीय अशोक जी, सादर अभिवादन!

बहुत ही सुंदर मनभावन रचना!

Comment by Dr.Ajay Khare on March 23, 2013 at 12:24pm

raktale ji really u r great nice rachana badhai

Comment by ram shiromani pathak on March 23, 2013 at 12:12pm

आदरणीय आनंद आ गया .....बहोत खूब प्राणाम सहित हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"आदाब, आदरणीय, आप सही कह रहै है अवकाश मिलते ही आपके संकेतानुसार पुनः सही स्वरूप में…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post कौन हो तुम — डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन । बहुत अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post रोटी
"मोहतरम जनाब, समर कबीर साहब, आदाब, आप कविता, रोटी .तक पहुँचने की ज़हमत की, इसके लिए आपका बहुत-बहुत…"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"'हलचल भी नहीं है' तो रदीफ़ है, क़वाफ़ी मतले में 'वो' और 'तो' हैं, बाक़ी…"
6 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बड़ी नज़ाकत से हमने .....
"आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
6 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दस्तक :
"आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
6 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post दौड़ अपनी-अपनी (लघु- कथा)
" मोहतरम जनाब, समर कबीर साहब, आदाब, आपने लघुकथा " दौड़ अपनी अपनी" तक पहुँचने की…"
6 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"आदाब आदरणीय, समर कबीर साहब ,  उक्त ग़ज़ल के मतले के दोनों मिसरों में चूँकि एक ही काफिया ( हलचल…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब्र दशकों से किये है -लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए आभार।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब्र दशकों से किये है -लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए धन्यवाद ।"
7 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post केवल ऐसी चाह
"आ0 समर कबीर साहेब, आदाब हार्दिक धन्यवाद,आपका"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post कौन हो तुम — डॉo विजय शंकर
"जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब, उम्मीद है आप ख़ैरियत से होंगे । बहुत उम्द: रचना हुई है,बहुत दिनों बाद…"
8 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service