For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने- २२

दिल एक रेलवे स्टेशन सा हो गया है......

--------------------------------------------------------------

दिल एक रेलवे स्टेशन सा हो गया है. वो भी किसी छोटे से कसबे का जहाँ दिन में कुछ गाडियां ही आती जाती है, और दिन भर एक वीरानी सी पसरी होती है पटरियों पे. सारा दिन जैसे ३ बजे की लोकल का और शाम की मुंबई वाली पैसेंजर का इन्तेज़ार रहता है. थोड़ी देर की धड़कन, कुछ लम्हे की रौनक, कुछ मिनटों की भाग दौड़, और फिर मीलों लंबे समय का न कटने वाला साथ.

 

ज़िंदगी में सवारियों की तरह लोग भी आते जाते रहे, अपनी अपनी ज़रूरतों की गठरियां लिए, अपने अपने मुकामात के ख्यालों में डूबे, अपनी अपनी आँखों में बस अपना अपना ही लिए आए और चले गए. पीछे हर बार रह गयासाफ़ करने को इक ज़खीरा- मुसाफिरों के मुड़े चुडे अखबार, कागज़ की प्लेटें, पानी की खाली बोतलें और कही अनकही कहानियों के बोल जो हवाओं की खिड़कियों से पर्दों की तरह लहराते हैं.

 

आज का दिन भी जैसे किसी युक्लिप्टस के पेड़ सा खड़ा है. कितना साफ़, कितना लंबा, कितना खुश्क, और पुरानी यादों सा महकता हुआ. पीछे मुड़कर देखा तो युक्लिप्टस की कतारें जैसे थीं, खामोशियों से गोया सिगारकश और मेरे दिल में झाँकतीं- मंदिरों की शिखाओं पे पताकों की तरह लहरातीं. इमरोज़ (आज का दिन) के आईने में गुज़रे हर रोज़ का एक आईना है जिसमें मुस्तकबिल (भविष्य)की हज़ारों तस्वीरें नुमायाँ (व्यक्त) हैं.

 

कोई मेरे दिल के खंडहरों से अभी अभी निकल के गया. कौन था जो अब तक इन खंडहरों को आबाद किए था अपनी रौनक से. चेह्रे तो नज़र आते नहीं, कदमों की आवाज़ भी नहीं, बस कुछ नक्शेपा हैं जिनके पीछे मैं चल पड़ा हूँ. मेरे साथ मेरे खंडहरों की थोड़ी धूल, और माज़ी (अतीत) की बोसीदगी (प्राचीनता) है, अगर वो मुझे मिल भी जाए तो कैसे नवाजूँगा उसे, किस तरहा दो नज़रों के डूब जाने तक जिंदा रह पाउँगा.

 

© राज़ नवादवी

पुणे, १४/०३/२०१२ 

Views: 143

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by राज़ नवादवी on July 3, 2012 at 9:09pm

धन्यवाद रेखाजी, बहुत बहुत शुक्रिया. आपलोगों की बातें बहुत हौसला देतीं हैं. 

Comment by Rekha Joshi on July 2, 2012 at 12:28pm

राज़ जी .डायरी के पन्नो में लिखी दास्तान में दर्द भरा हुआ है ,सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।
"अज़ीज़म रूपम कुमार, ग़ज़ल पर उपस्थिती और उत्साहवर्धन के लिये आभार। "
9 minutes ago
Anvita posted a blog post

"लोग"

लोग इससे ज्यादाक्या करेंगे ...छीन लेंगे हॅसीरोक लगा देंगे कहकहों पर,औरघोंट देंगें दम..मुस्कुराहटों…See More
17 minutes ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बहुत-बहुत आभार आपका आदरणीय सरजी। "
44 minutes ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"जी,बहुत-बहुत धन्यवाद आपका आदरणीय सरजी। "
44 minutes ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बाल गजल(मैंने डिग्री हासिल की है..)
"आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई जी।"
44 minutes ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"शायद।आभार आपका ध्यानाकर्षण के लिए आदरणीय सरजी। "
45 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post बाल गजल(मैंने डिग्री हासिल की है..)
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदाब। आपकी सम्मान्य उपस्थिति व प्रोत्साहक टिप्पणी हेतु बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब ईंजी. गणेश जी बाग़ी…"
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"जी आदरणीय, स्पष्ट करने हेतु आभार।"
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"प्रिय शेख़ शहज़ाद भाई, एक नए कथानक की लघुकथा जो अलग शैली में कही गयी है, बधाई आपको।"
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी, यह टिप्पणी स्वतंत्र रूप से पोस्ट हो गयी है, कृपया उचित थ्रेड में कट पेस्ट…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदाब। मेरी रचना पर हमेशा की तरह समय व टिप्पणी देकर मेरी 'सुधी पाठकीय हौसला अफ़ज़ाई' हेतु…"
1 hour ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service