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प्रभुता  की बागडोर आप सबके ही हाँथ,
चेतना में आके मान  देश  का  बढाइये.
काम कुछ  ऐसे करो रिपु भी दहल जाये,
जन -गण मन पूरे  विश्व  से  पढ़ाइये. 
अस्मिता से खेलने को जो बढ़ाये हाँथ आगे ,
काट  दो  वो  हाँथ  और  कफ़न  उढ़ाइए  .
संतति अनूप यदि माता भारती की हो तो,
देश  रक्षा  हेतु  भेंट  खुद  को  चढ़ाइए ..

जाति, धर्म, संप्रदाय में न बांटो देश यारों ,
फैंसला तुम्हारा तुम्हे भारी पड़ जाएगा.
क्यों प्रमत्त घूमते हो चित्त में सुधार करो,
देखना  तिरंगा सीमा पार गड़ जाएगा. 
एक पग  भूमि यदि छीनने को शत्रु बढ़े,
घाव ऐसे देंगे कि वो पाँव सड़ जायेगा. 
ढूढने से चित्र  मानचित्र में मिलेगा नहीं ,
जिद पे जो कोई देशभक्त अड़ जायेगा.. 

क्या लड़ेंगे बैरियों से किसपे गुमान करें ,
छत जो बचा न पाए अपने मकान क़ी.
स्वार्थपरता क़ी सीढ़ियों पे जो कदम चलें, 
कीमत लगाऊ मैं क्या उनके थकान  क़ी .
बीज विस्फोटकों का बेंच रहा सरेआम, 
धज्जियाँ उड़ा दो ऐसे बारूदी दुकान क़ी .
हो न पाए अनुक्षय स्वाभिमान भारत का ,
आभा कम हो न पाए माँ के मुस्कान क़ी ..

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Comment

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Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 1, 2012 at 12:56am

श्री सौरभ सर जी सादर  प्रणाम स्वीकार करें , उत्साहवर्धन के लिए आपका आभार व शत- शत वंदन, 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 1, 2012 at 12:38am

भाई शैलेन्द्रजी, आपकी इस मंच पर कोई पहली रचना देख रहा हूँ.  घनाक्षरी छंद में प्रस्तुत माँ भारती के प्रति नमन स्वरूप इस रचना पर शैलेन्द्रजी आपको हार्दिक बधाइयाँ.  सभी छंद अत्यंत समृद्ध हैं.

आपकी उपस्थिति आशान्वित कर रही है, शैलेन्द्रजी.

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 29, 2012 at 9:03am

श्री अरुण जी उत्साहवर्धन के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद 

Comment by Abhinav Arun on February 29, 2012 at 8:26am

शैलेन्द्र जी इस रचना की जितनी तारीफ की जाए कम गहरे भाव और सशक्त अभिव्यक्ति बहुत बहुत शुभकामनाएं आपको !!

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 25, 2012 at 11:30am

 राजेश कुमारी मैम कृति को समर्थन देने के लिए एवं स्नेहाशीष  प्रदान करने के लिए आपको मेरा शत शत वंदन व अभिनन्दन 

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 25, 2012 at 11:21am

श्री गणेश सर कृति पर समर्थन एवं मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 25, 2012 at 11:07am

वाह वाह शैलेंद्र जी आपकी लेखनी को सलाम एक जोश भरी वीर रस की कविता पढ़ कर रोंगटे खड़े हो गये ,बहुत प्रेरक कविता देश को एसए युवाओं की ज़रूरत है आज |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 25, 2012 at 11:02am

//ढूढने से चित्र  मानचित्र में मिलेगा नहीं ,

जिद पे जो कोई देशभक्त अड़ जायेगा.. //
शैलेन्द्र जी बहुत ही खुबसूरत भावभिव्यक्ति , देश को ऐसे ही नवजवानों की जरुरत है, अच्छी रचना पर बधाई स्वीकार करें |
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 25, 2012 at 11:01am

श्री सतीश सर जी उत्साहवर्धन के लिए व अपना आशीर्वाद प्रदान करने के लिए बहुत बहुत आभार .

Comment by satish mapatpuri on February 25, 2012 at 10:19am
क्या लड़ेंगे बैरियों से किसपे गुमान करें ,
छत जो बचा न पाए अपने मकान क़ी.
स्वार्थपरता क़ी सीढ़ियों पे जो कदम चलें,
कीमत लगाऊ मैं क्या उनके थकान  क़ी .
बीज विस्फोटकों का बेंच रहा सरेआम,
धज्जियाँ उड़ा दो ऐसे बारूदी दुकान क़ी .
हो न पाए अनुक्षय स्वाभिमान भारत का ,
आभा कम हो न पाए माँ के मुस्कान क़ी ..
आपकी भावना काबिले तारीफ़ है .......... बधाई शैलेन्द्र जी

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