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एक चेहरा जो याद नहीं

एक चेहरा जो याद नहीं, एक चेहरा जो मैं भूल गया

तस्वीर भला मैं क्या खिंचू, तस्वीर बनाना भूल गया

एक लम्हा जो ना लौटा फिर, वो एक लम्हा जो मैं भूल गया

यादें अब समेटूँ कैसे मैं, जो यादें बनाना भूल गया

एक गली जो कभी फिर मिली नहीं, वही गली जो मैं भूल गया

कैसे कदम बढ़ाऊँ घर को, मैं घर का रास्ता भूल गया

एक नज़्म कभी जो गायी थी, कुछ मिश्रे उसके भूल गया

कैसे ग़ज़ल बनाऊँ मैं अब, जो लफ्ज बनाना भूल गया

 

एक चिट्ठी मुझको आई थी, वो चिट्ठी पढ़ना भूल गया

माँ के बतलाए नुसख़ों को, जीवन में लाना भूल गया

जिस चाहत से घर को छोड़ा था उस चाहत को अब मैं भूल गया

मंज़िल पाने की चाहत में, मंज़िल का रस्ता भूल गया

 

कुछ क़िस्से आधे छोडे थे, उनको पूरा करना भूल गया

कुछ बातेंं आधी-अधुरी थी, उन्हे कहना-सुनना भूल गया

कुछ मनमानी की चक्कर में, जीवन को जीना भूल गया

कुछ दौड भाग की चक्कर में, मैं खुद से मिलना भूल गया

कुछ प्यार भरे मुलाक़ातों का मैं लेखा जोखा भूल गया

अपनों और परायों का जो एहसान था मुझपर भूल गया

अब लौटा हूँ उन राहों पर, उन गलियों मे, उस कमरे में

अब जाना बस मैं ही नही, यह जग भी मुझको भूल गया

"मौलिक व अप्रकाशित" 

अमन सिन्हा 

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Comment by Dr. Vijai Shanker on August 14, 2023 at 9:40pm

कुछ मनमानी के चक्कर में, जीवन को जीना भूल गया l
कुछ दौड भाग की चक्कर में, मैं खुद से मिलना भूल गयाll ❤

आदरणीय अमन सिन्हा जी , बहुत ही गंभीर प्रस्तुति , अच्छी लगी , हार्दिक बधाई।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 17, 2023 at 10:11am

आदरणीय अमन सिन्हा जी आदाब, बहुत ख़ूबसूरत अहसासात से लबरेज़ रचना हुई है, हार्दिक बधाई।

Comment by Shyam Narain Verma on July 16, 2023 at 6:21pm
नमस्ते जी, बहुत खूब, हार्दिक बधाई l सादर

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