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Anwar suhail's Blog – May 2015 Archive (1)

अम्मी

हम बड़े हो रहे थे

लेकिन आप हमें

बच्चा ही समझती थीं

और जब हम अकड दिखाते

बात-बेबात बहस करते

तो आप खामोश हमें ताकते रहतीं

हम अपने मन की करते

और आपकी खामोश आँखें करतीं

हमारी सलामती की दुवाएं..



आज आप नहीं हैं

और इस संसार में

हम यूँ फिर रहे हैं

जैसे कोई फल हों

सड़क किनारे पेड़ के

जिसपर हर कोई

आजमाता है पत्थर...

हम बड़े ज़रूर हुए हैं अम्मी

लेकिन ममता की ऊष्मा से

वंचित हैं…

Continue

Added by anwar suhail on May 10, 2015 at 7:00pm — 5 Comments

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