For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तेरी मीठी बातों से ही
भरता मेरा पेट प्रिय,
जिस दिन तू गुमसुम रहती है-
भूखा मैं सो जाता हूँ !!

मैखाना, ये आँखें तेरी
पीने दे मत रोक प्रिय,
जब जब ये छलका करती हैं-
और बहक मैं जाता हूँ !!

रहता हूँ तेरे दिल में मैं
बनकर तेरा दास प्रिय,
जब भी टूटा है दिल तेरा-
तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!

मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ
जब होती हो तुम साथ प्रिय,
छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-
ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ !!

तू ही कह दे अब कहाँ गुजारूँ
तुझ बिन अपनी रात प्रिय,
तेरी ही बाहों में अक्सर-
थककर के मैं सो जाता हूँ !!

तुम बिन मेरा जीवित रहना
है नामुमकिन सी बात प्रिय,
तुम बिन जीने को सोचूँ तो-
पागल सा मैं हो जाता हूँ !!

कई जरूरत थीं मेरी-
जो हुई मुकम्मल आज प्रिय,
तू ही तो मेरी सब कुछ है-
मैं तुझमें ही सब पाता हूँ !!

तेरी आँखों में ये आँसू
ना देख सकूँगा आज प्रिय,
मैं तो तेरे दिल में ही हूँ-
कब छोड़ तुझे मैं जाता हूँ !!

( मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 289

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rakshita Singh on January 14, 2019 at 12:17pm

आदरणीय महेन्द्र जी नमस्कार,

रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।।

Comment by Mahendra Kumar on January 7, 2019 at 7:56pm

अच्छी रचना है आदरणीया रक्षिता सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Rakshita Singh on January 6, 2019 at 1:06am
आदरणीय कबीर जी, नमस्कार
आपको रचना पसंद आई तो अवश्य ही मेरा लिखना सार्थक हुआ ..
रचना पर प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद , कृपा मार्गदर्शक बनायें रखें। ।
Comment by Samar kabeer on January 5, 2019 at 12:08pm

मोहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"आ. भाई गुरप्रीत जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई। "
11 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"शुक्रिया आदरणीय सुशील सरना जी"
12 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
" शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी "
12 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब
"हार्दिक बधाई आदरणीय मुसाफ़िर जी। लाजवाब ग़ज़ल। "
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ बजेगा भोर का इक दिन गजर आहिस्ता आहिस्ता  सियासत ये भी बदलेगी मगर आहिस्ता…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन दोहे हुए हैं ।हार्दिक बधाई।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, बहुत ख़ूब दोहा त्रयी हुई है। विशेष कर प्रथम एवं तृतीय दोहा शानदार हैं।…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

धक्का

निर्णय तुम्हारा निर्मलतुम जाना ...भले जानापर जब भी जानाअकस्मातपहेली बन कर न जानाकुछ कहकरबता कर…See More
yesterday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० सौरभ भाई जी, जन्म दिवस की अशेष शुभकामनाएँ स्वीकार करें। आप यशस्वी हों शतायु हों।.जीवेत शरद: शतम्…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . . . .

दोहा त्रयी. . . . . . ह्रदय सरोवर में भरा, इच्छाओं का नीर ।जितना इसमें डूबते, उतनी बढ़ती पीर…See More
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के)

1121 -  2122 - 1121 -  2122 जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के वो रगों में दौड़ते हैं…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आ. भाई सौरभ जी, आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ ।"
Monday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service