For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर
बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल

ख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी है
समय के साथ दुनिया में है रह पाना बहुत मुश्किल

कहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हम
जुबां से दिल की बातो को है कह पाना बहुत मुश्किल

ज़माने से मिली ठोकर तो अपना हौसला बढता
अपनों से मिली ठोकर तो सह पाना बहुत मुश्किल

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है
क्या खोया और क्या पाया कह पाना बहुत मुश्किल

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है
"मौलिक व अप्रकाशित"
मदन मोहन सक्सेना

Views: 490

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 7, 2016 at 5:28pm

आदरणीय मदन मोहन सक्सेना जी सादर, सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है किन्तु आदरणीय गिरिराज भंडारी जी का प्रश्न तो अपनी जगह है ही. सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2016 at 9:43am

आदरणीय मदन मोहन भाई , रचना के भाव अच्छे लगे , हार्दिक बधाई । किस विधा की रचना है ये नही समझ पाया ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 4, 2016 at 3:15pm
कहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हम
जुबां से दिल की बातो को है कह पाना बहुत मुश्किल
ज़माने से मिली ठोकर तो अपना हौसला बढता
अपनों से मिली ठोकर तो सह पाना बहुत मुश्किल वाह । बहुत खूब ।हार्दिक बधाई आदरणीय

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"                        बाई…"
3 minutes ago
vibha rani shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"गद्य में काव्य की अनुभूति हो रही है..."
8 minutes ago
vibha rani shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"बन्धु का तो पता नहीं... मेरी कोशिश"
10 minutes ago
vibha rani shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"'मार्गदर्शन' विभा रानी श्रीवास्तव "आप क्या सोच रहे हैं पिताजी?"पिता को बड़े…"
11 minutes ago
Chetan Prakash posted blog posts
29 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted blog posts
29 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं। 'एक…"
8 hours ago
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदाब, भाई, लक्ष्मण लिंह धामी मुसाफिर साहब, बह्र रमल मुसद्दस सालिम (2122 2122 2122 ) में कहीं अचछी…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२*जो नदी की  आस  लेकर जी रहे हैंएक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं।१।*है बहुत धोखा सभी की…See More
12 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"लघुकथा गोष्ठी का आज अंतिम दिन उम्मीदों से पूर्ण है।"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय चेतनप्रकाशजी, आपका रचना पर स्वागत है.  आपके बिंदु विचारणीय हैं.  आप भी तनिक और…"
yesterday
नाथ सोनांचली commented on नाथ सोनांचली's blog post मदिरा सवैया आधारित दो छन्द
"आद0 सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम रचना पर आपकी उपस्थिति किसी पुरस्कार से कम नहीं। हृदयतल से आभार…"
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service