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ग़ज़ल - हो दल कोई भी हम तो सबको ही दलदल समझते हैं - अनुज

बहरे हजज़ मुसम्मन सालिम

मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन

1222 1222 1222 1222



खरे सोने को भी दुर्भाग्यवश पीतल समझते हैं

सदा कुछ लोग होते हैं जो जल को थल समझते हैं



जो करते रहते है खुद की प्रशंसा खुद ही आपस में

कुछ ऐसे ठूंठ भी अब सब को ही निष्फल समझते हैं



सिवा बकवास करने के जिन्हें और कुछ नहीं आता

कुछ ऐसे शुद्ध मुर्ख अब सब को ही पागल समझते हैं



समय ऐसा भी आता है कि तन भी ढक नहीं पाते

अहम में फूल कर जो खुद को राजा नल समझते… Continue

Posted on June 5, 2016 at 9:01pm — 8 Comments

ग़ज़ल - ये दुनिया बस यही है और क्या है - अनुज

बहरे हज़ज  मुसद्दस महजूफ़

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन 

1222  1222  122 

मुसलसल गुमरही  है और क्या है  

ये अब जो ज़िन्दगी है और क्या है

 

अभी थोड़ी  ख़ुशी  है और क्या है

कमाले - ज़िन्दगी   है और क्या है

 

न हो के भी  हो मेरी ज़िन्दगी  में

गनीमत  ये  बड़ी  है और क्या है

 

तुम्हारा जिक्र कुछ दुनिया का शिकवा

यही  तो  शायरी  है और क्या  है

 

बुरे है लोग कुछ, कुछ लोग अच्छे

ये दुनिया बस…

Continue

Posted on May 29, 2016 at 7:15pm — 14 Comments

ग़ज़ल है, खाला का घर नहीं है

१ २ २ २   २ १ २ १   २ २ 

इधर से सबकी गुजर नहीं है

ग़ज़ल है, खाला का घर नहीं है

 

बुरी है जो बात सबसे ज्यादा

उसी की तुझ को खबर नहीं है

 

गुजरना क्यों कर हो अब उधर से

वो जो तेरी  रहगुजर नहीं है

 

नहीं है कुछ भी मेरे लिए वो  

नज़र जो तेरी नज़र नहीं है 

कहाँ हो तुम और कहाँ हैं हम अब

हमें तो कुछ भी खबर नहीं है

मुहब्बत सबसे हमारी फितरत 

हमें अब कोई भी डर नहीं…

Continue

Posted on May 16, 2016 at 9:00pm — 45 Comments

ग़ज़ल - सुना अब वो भी सुधर गयी है - अनुज

1 2 2 2   2 1 2 1   2 2

जो  बाढ़  आई  थी  गुजर  गयी  है

नदी   अब   नीचे   उतर  गयी   है

खिले फिर  कासों  के फूल  उजले

फज़ा फिर खुशबू से  भर  गयी  है

घटा  फिर उतरी  है तेरी  छत  पर

हवा  फिर कुछ और निखर गयी है

तसव्वुर   तेरा   था    मेरी     पूँजी

वो  भी  अब  जैसे  बिखर  गयी  है

जो  थी  इक जिद्दी  लड़ाकू लड़की 

सुना  अब  वो  भी  सुधर   गयी  है 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Posted on May 15, 2016 at 4:30pm — 6 Comments

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At 4:21pm on April 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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