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पुस्तक समीक्षा Discussions (110)

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सदस्य टीम प्रबंधन

सुनो मुझे भी – जगदीश पंकज // --सौरभ

सकारात्मक एवं स्पष्ट वैचारिकता निस्संदेह परिष्कृत अनुभवों की समानुपाती हुआ करती है. इसी क्रम में कहें तो किसी व्यक्ति की सोद्येश्य तार्किकत…

Started by Saurabh Pandey

2 Jul 28, 2015
Reply by Saurabh Pandey

सदस्य टीम प्रबंधन

महेन्द्र भटनागर के नवगीत - दृष्टि और सृष्टि // --सौरभ

महेन्द्रजी की कविताओं में जीवन के प्रति असीम राग है. ==================================== छः दशकों के काल-खण्ड में क्रियाशील व्यक्ति की रचन…

Started by Saurabh Pandey

4 Jun 29, 2015
Reply by Saurabh Pandey

सदस्य टीम प्रबंधन

शब्द गठरिया बाँध : अरुण कुमार निगम // --सौरभ

पद्य-साहित्य के इतिहास में कई बार यह समय आया है जब रचनाओं में कथ्य के तथ्य प्रभावी नहीं रह गये. रचनाओं से ’क्यों कहा’ गायब होने लगा और ’कैस…

Started by Saurabh Pandey

2 Jun 18, 2015
Reply by rajesh kumari

‘सृष्टि पर पहरा’ काव्य-संकलन के आइने में केदारनाथ सिंह- डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

                          ‘सृष्टि पर पहरा’ कवि एवं आलोचक केदारनाथ सिंह का आठवाँ काव्य-संग्रह है i इसकी पह्ली कविता ‘सूर्य 2011’ में कवि सूर…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

4 Apr 27, 2015
Reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

लेखक की आत्मा- अर्चना ठाकुर (पुस्तक समीक्षा)

  वर्तमान में जब  दलित विर्मश या स्त्री विर्मश आज के कथाकारों की कहानियों का केन्द्र बिंदु  होता है वही अर्चना ठाकुर जी किसी भी विचार धाराओ…

Started by MAHIMA SHREE

1 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

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तेरे नाम का लिये आसरा - अनुभव एवं काव्य प्रतिभा का संग्रहणीय संकलन

हमेशा से मेरा ये मानना है कि ज़िन्दगी मुसलसल हर सांस के साथ फ़ना होती है और हर सांस के साथ शुरू । किसी काम के करने का मुनासिब वक्त कौन सा ह…

Started by शिज्जु "शकूर"

4 Apr 23, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

नवीन सम्भावना के अन्यतम पर्याय :: राहुल देव - डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

                                                       हिन्दी के नवोदित कवि एवं कथाकार राहुल देव (ज0 1988 -   )का प्रथम कथा-संग्रह “अनाहत ए…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

7 Apr 18, 2015
Reply by Saurabh Pandey

सदस्य कार्यकारिणी

नारी संवेदनाओं की अनूठी अभिव्यक्ति है – बंजारन

नारी संवेदनाओं की अनूठी अभिव्यक्ति है – बंजारन डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव ******************** नारी पीड़ा को हिंदी साहित्य में अनेक कवियों…

Started by sharadindu mukerji

0 Oct 27, 2014

आचमनीय है इस ‘काव्य-कलश’ का सुधा-सलिल -डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

                     तंत्र में कलश एक निर्धारित माप का घड़ा होता है जिससे मांगलिक विधान किये जाते है  I इन विधानों में कलश में सभी तीर्थो का…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

2 Oct 17, 2014
Reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

एक संक्षिप्त टिप्पणी

सौरभ पांडेयजी के " इकड़ियाँ जेबी से " पढ़ा। इसमे संकलित सभी रचनाएँ साधारण है. उतनी जितनी कि हवा, धूप या पानी हो सकते हैं।  या यूँ कहें कि ख…

Started by ASHISH ANCHINHAR

0 Aug 25, 2014

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'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 140

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ चालीसवाँ आयोजन है.…See More
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आचार्य शीलक राम posted a blog post

व्यवस्था के नाम पर

कोई रोए, दुःख में हो बेहाल असहाय, असुरक्षित, अभावग्रस्त टोटा संगी-साथी, हो कती कंगाल अत्याचार,…See More
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Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप

2122 2122 2122 212मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप शाम-सी मुझ में उदासी, सुब्ह के मंज़र-से…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा
"आ. अंजुमन जी, अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

गीत -६ ( लक्ष्मण धामी "मुसाफिर")

रूठ रही नित गौरय्या  भी, देख प्रदूषण गाँव में।दम घुटता है कह उपवन की, छितरी-छितरी छाँव में।।*बीते…See More
yesterday
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा

1222 1222 1222 1222अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा परिंदा टूटा है बाहर अभी अंदर नहीं टूटा…See More
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नर हूँ ना मैं नारी हूँ

नर हूँ ना मैं नारी हूँ, लिंग भेद पर भारी हूँपर समाज का हिस्सा हूँ मैं, और जीने का अधिकारी हूँ जो है…See More
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"मिली मुझे शुभकामना, मिले प्यार के बोलभरा हुआ हूँ स्नेह से,दिन बीता अनमोलतिथि को अति विशिष्ट बनाने…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ. भाई सौरभ जी को जन्मदिन की ढेरों हार्दिक शुभकामनाएँ ।।"
Dec 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तिनका तिनका टूटा मन(गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२/२२/२२/२ सोचा था हो बच्चा मन लेकिन पाया  बूढ़ा मन।१। * नीड़  सरीखा  आँधी  में तिनका तिनका…See More
Dec 3
आचार्य शीलक राम posted blog posts
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