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आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,

                                 आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब के ग़ज़ल संग्रह की समीक्षा पढ़कर बहुत ही अभिभूत हूँ । ग़ज़ल और अरूज़ के इतने बड़े विराट व्यक्तित्व को आपने अपनी सहज-सरल लेखनी में ढाल दिया वाकई कमाल है । इसकी जतनी प्रशंसा की जाय कम है । मेरे पास शब्द नहीं है । बहुत ही सटीक , सारगर्भित समीक्षा है । 

                                                इस अद्भुत कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लीए हृदयतल से आभार । कुछ बातें कहना चाहूँगा जो छूट गई है जैसे:- समीक्षा के अंत में समीक्षक का पूर नाम मय पते के साथ होना चाहिए , पुस्तक का पूरा नाम और साथ में कोष्ठक में विधा जैसे ग़ज़ल संग्रह है तो ग़ज़ल संग्रह या काव्य संग्रह है तो काव्य संग्रह आदि , प्रकाशक का पूरा नाम और पता , लेखक का नाम और आख़िर में पुस्तक का मूल्य ।

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आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,

                                 आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब के ग़ज़ल संग्रह की समीक्षा पढ़कर बहुत ही अभिभूत हूँ । ग़ज़ल और अरूज़ के इतने बड़े विराट व्यक्तित्व को आपने अपनी सहज-सरल लेखनी में ढाल दिया वाकई कमाल है । इसकी जतनी प्रशंसा की जाय कम है । मेरे पास शब्द नहीं है । बहुत ही सटीक , सारगर्भित समीक्षा है । 

                                                इस अद्भुत कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लीए हृदयतल से आभार । कुछ बातें कहना चाहूँगा जो छूट गई है जैसे:- समीक्षा के अंत में समीक्षक का पूर नाम मय पते के साथ होना चाहिए , पुस्तक का पूरा नाम और साथ में कोष्ठक में विधा जैसे ग़ज़ल संग्रह है तो ग़ज़ल संग्रह या काव्य संग्रह है तो काव्य संग्रह आदि , प्रकाशक का पूरा नाम और पता , लेखक का नाम और आख़िर में पुस्तक का मूल्य ।

आपको ये समीक्षा पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ आद० मोहम्मद आरिफ जी .आपने सही ध्यान दिलाया अंत में पुस्तक का नाम मूल्य प्रकाशक के विषय में होना चाहिए था .उसको भी एड कर दूंगी |आपका बहुत बहुत धन्यवाद |

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