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होली मनाएं हम (प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा)

होली मनाएं हम
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हर वर्ष की तरह इस बार भी आपका अंगना होली हेतु तैयार है। घर की साफ़ सफाई , लिपाई -पुताई, हो चुकी है. करीने से सामान सुरक्षित कर दिया गया है. विभिन्न कारणों से घर से बाहर गए स्वजन त्यौहार में घर लौट चुके हैं. अपरिहार्य परिस्थितियों में अवकाश न मिलने या अन्य कारणों से जिनके स्वजन नहीं आ पा रहे हैं उनके परिजनों के अन्तः पीड़ा , व्यथा को घर के कोने और आंखो के कोने की नमी महसूस किये बिना कौन रह सकता है।
कुछ घर ऐसे भी हैं जिनके यहाँ इस वर्ष गमी की होली मनायी जायेगी जिनके परिवार के सदस्य कभी वापस नही लौटेंगे, कारण कुछ मौतें शराब के कारण सडक दुर्घटना होना, जहरीली शराब से मौतें. आपसी झगड़े इत्यादि।
क्या त्यौहार बगैर नशे संभव नही।
शुरुआत होती है होली की लकडियों के चंदा एकत्रित होने से लेकर होलिका दहन तक , एकत्रित चंदे से कुछ हिस्सा जाता है नशे हेतु.
कई दिन पहले से ही नशे की सामग्री इकठी करते हैं, बड़े शान से.
दुष्परिणामों से भली भाँती परिचित हैं फिर भी चेतते नही हैं?
नशे के कारण अकाल मौत के अगले शिकार आप तो नही ?
दूसरे की असावधानी से आप सुरक्षित कब तक ?
क्या इसे हम नियंत्रित नहीं कर सकते ?
क्या कोरे कागज़ पर सन्देश देने से बदलाव आ जायेगा।
क्या कर सकते है आप ?
१. आत्म नियंत्रण
२. परिवार के सदस्यों पर नियंत्रण
३. पड़ोसियों से नशे के दुष्परिणामो पर गहन चर्चा /परिचर्चा
४. कम से कम मोहल्ले के ३ व्यक्तियों से चर्चा कर नशा विरोधी माहौल बनाना. इसी प्रकार ये तीन व्यक्ति ३-३ सदस्यों को नशे के विरोध में कार्य करने हेतु तैयार करें.
५. मोहल्ले के सभी सदस्य नशा न करने और इसके दुष्परिणामों से ज्यादा से ज्यादा लोगों को अवगत करने का संकल्प लें.
६. समूह में गाये जाने वाले फाग /आयोजित कवि सम्मेलनों में नशा विरोधी गीतों /चर्चा का समावेश किया जाय।
७. स्वविवेक।
होली की हार्दिक शुभ कामनाये
प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा
मौलिक /अप्रकाशित

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Replies to This Discussion

आदरणीय कुशवाहा सर:
आपका यह सार्थक लेख होली वाले दिन ही मैंने पढ़ा था...बड़ा सुकून मिला आपकी शुभकामनाओं के साथ इस तरह की प्रेरणादायक विचारों को पढ़कर.

सच में आवश्यकता है आज इस तरह की प्रयासों की,खासकर ग्रामांचलों में,जहां लोग समझते हैं कि किसी अवसर का पूर्ण आनन्द नशे की हालत में ही लिया जा सकता है.

शराब विभिन्न कुकर्मों को जन्म देती हुई समाज को असहनीय दुष्परिणामों तक पहुंचाती है.
जहां तक मेरा अनुभव है...मादक पदार्थों का सेवन करने वाला लगभग हर व्यक्ति इसके दुष्परिणामों को भली-भांति जानता है,अपने ही माध्यम से या अपने की सम्बन्धी के माध्यम से,फिर भी पता नहीं क्यों इससे दूर रहना उसे स्वीकार्य क्यों नहीं होता!

3-3 क्या आदरणीय,यदि एक व्यक्ति एक ही व्यक्ति को दिशा देने का प्रयास करे,और सफल हो तब भी बड़ी सफलता होगी.

आपको बहुत धन्यवाद इस आन्तरिक समस्या को उजागर करने लिए और निदान के प्रयास हेतु प्रेरित करने के लिए.

हम त्योहार और दिन-प्रतिदिन की खुशहाली और शान्ति की मंगलकामना करते हैं.

सादर
शुभ शुभ

स्नेही वन्दना जी 

सादर 

आपने होली की व्यस्तता के मध्य इसे पढ़ा आभार. 

आशा है अगली बार कुछ लाभ होगा समाज को 

जय हो मंगलमय हो 

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