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तुम ना आया करो ख्वाब मे

तुम ना आया करो ख्वाब में हमें रुलाने के लिए
टूट चुके उन नातों को फिर से तोड़ जाने के लिए
तुम जा चुके हो मान लो, इस सत्य को तुम जान लो
उस जहां से ना आया करो हमें सताने के लिए

तुम्हें गए हुए अब दो वर्ष बीत चुके है
बिन तुम्हारे जीना अब हम सीख चुके है
तुम लौटा ना करो सपनों में हमें जगाने के लिए
रात भर जाग कर बस तुम्हें भुलाने ले लिए

मुझे मालूम हैं के हम अंतिम क्षण मिल ना पाए थे
मैं खड़ा था वहीं पर मैंने कदम नहीं बढ़ाए थे
अब आगे बढ़कर तुम मेरे पास ना आया करो
मेरा हाथ ना थामो तुम अब साथ ले जाने के लिए

जो कोई फर्ज़ रह गया हो तो दिल अपना साफ कर लो
कोई कर्ज़ जो रह गया हो तो खुद को माफ कर लो
तुम याद न दिलाया करो अपनी हमारे पछतावे के लिए
तुम याद ना आया करो ख्वाबों हमें रुलाने के लिए

"मौलिक व अप्रकाशित"
अमन सिन्हा

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Comment by रौशन जसवाल विक्षिप्‍त on April 15, 2023 at 9:32am

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