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*करगिल विजय*

वज्रपात कर दुश्मन दल पर, सबक सिखाया वीरों ने
किया हिन्द का ऊँचा मस्तक, करगिल के रणधीरों ने
हर खतरे का किया सामना, लड़ी लड़ाई जोरों से
पग पीछे डरकर ना खींचे, बुझदिल और छिछोरों से l

धीर वीर दुर्गम चोटी पर, कसकर गोले दागे हैं
बंकर चौकी ध्वस्त किये सब, कायर कपूत भागे हैं
किये हवाई हमला भारी, धूर्त सभी थर्राए हैं
अरि मस्तक को कुचल-कुचल कर, अपना ध्वज लहराए हैं l

जब-जब दुस्साहस करता है, दुश्मन मारा जाता है
सरहद का उल्लंघन करके, निसदिन मुँह की खाता है
शत-शत नमन करूँ वीरों को, जिसनें लाज बचाई है
वतन हिफाजत करूँ शान से, आज कसम ये खाई है l

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 4, 2019 at 6:48am

आ. भाई छोटेलाल जी, सुंदर रचना हुई है , हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on July 30, 2019 at 2:42pm

जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on July 30, 2019 at 12:31pm

बेहतरीन रच्ना हुई बधई

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