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महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-आठ यगण प्रति पद; 122x8

चुनो मार्ग सच्चा करो कर्म अच्छे जहां में तुम्हारा सदा नाम होगा।
करो यत्न श्रद्धा व निष्ठा भरे तो न पूरा भला कौन सा काम होगा।।
न निर्बाध है लक्ष्य की साधना जूझना मुश्किलों से सरे-आम होगा।
इन्हें जीतना पीढ़ियों के लिए भी तुम्हारा नया एक पैगाम होगा।।1।।

करे सामना धैर्य से मुश्किलों का न कर्तव्य से पैर पीछे हटाए।
नहीं हार से हार माने जहां में कभी कोशिशों से न जो जी चुराए।।
अँधेरा घना या निशा हो घनेरी दिये आस के जो दिलों में जलाए।
वही आसमां पे लिखे कीर्ति-गाथा जहां को सदा राह सच्ची दिखाए।।2।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by रामबली गुप्ता on April 17, 2019 at 10:06am

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय समर भाई साहब

Comment by Samar kabeer on April 16, 2019 at 2:37pm

जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत समय बाद आपको पटल पर देख कर प्रसन्न्ता हुई ।

बहुत उम्द: छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by रामबली गुप्ता on April 15, 2019 at 4:14pm

सादर धन्यवाद भाई सुरेन्द्रनाथ जी

Comment by नाथ सोनांचली on April 13, 2019 at 10:00pm

आद0 रामबली गुप्ता जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन दोनों छंद लिखा आपने। सन्देश परक भी और शिल्पगत भी। बधाई स्वीकार कीजिये।सादर

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