For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 

भीड भरे रस्ते पे एक दिन,

बरसोँ पुराना दोस्त मिला । 

चेहरे से मुस्कान थी गायब,

स्वर भी कुछ रुखा सा मिला । । 

 

मैंने पूछा कैसे हो तुम,

वो बोला कुछ ठीक नहीं । 

मैंने पूछा और हाल-ए-इश्क,

सोच के बोला ली भीख नही । । 

 

उसके इस उत्तर से अचम्भित,

ठिठक  गया  मैं  चलते-चलते । 

फिर काँधे पे हाथ रख पूछा,

किसी से नहीं क्या मिलते-जुलते । । 

 

एक लम्बी ले शवाँस वो बोला,  

फिर राज़ दहर का सगरा खोला । 

मैंने जिसको चाहा,उसका मन,

और किसी की चाहत में डोला । । 

अब धीरे धीरे उमर जा रही,

आस का दीपक नही पा रही । 

अंत समय का कोई ना साथी,

दिल की धड्कन बैठी जा रही ।  । 

अब राह मिले ना मंज़िल कोई,

फिर भी ढुंढू मिल जाए कोई । 

जिससे दिल के मैं तार मिला दूँ,

मैं भी हूँ इंसा दिखला दूँ । । 

 

 

इतना कहकर वो चुप हो गया,

माज़ी में मैं भी था खो गया । 

अगले पल जब तंद्रा टूटी,

दर्द था उसका जो मेरा हो गया । । 

 

जीवन की आपाधापी में,

हम भूल गये सब रिश्ते नाते । 

हाय हैलो भी दूरभाष पर,

करके हम सब रस्म निभाते । । 

 -प्रदीप देवीशरण  भट्ट-

मौलिक व अप्रकशित

 

 

 

 

 

Views: 466

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on April 17, 2019 at 12:54pm

समर जी शुक्रिया

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on April 17, 2019 at 12:53pm

आभार हरिओम जी

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on April 17, 2019 at 12:51pm

शुक्रिया नीलम जी,

Comment by Neelam Upadhyaya on April 3, 2019 at 12:37pm

अच्छी रचना पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय प्रदीप भट्ट जी।

Comment by Samar kabeer on April 2, 2019 at 10:52am

जनाब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 1, 2019 at 5:06pm

बहुत खूब। हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service