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धरती का बोझ- लघुकथा

शोक सभा चालू थी, हर आदमी आता और मरे हुए लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी बात शुरू करता और फिर प्रशासन को कोसते हुए अपनी बात ख़त्म करता. बीच बीच में लोग उस एक व्यक्ति की भी तारीफ़ जरूर करते जिसने कई लोगों को बचाया था लेकिन अपनी जान से भी हाथ धो बैठा था.
उधर कही आसमान में रूहें एक जगह बैठी हुई जमीन पर चलने वाले इस कार्यक्रम को देख रही थीं. उनमें अधिकांश तो उस एक रूह से बहुत खुश थीं जिसने उनके कुछ अपनों को बचा दिया था लेकिन एक रूह बहुत बेचैन थी. उसे यह बात जरा भी हजम नहीं हो रही थी कि मंच पर आने वाले उसका तो जिक्र ही नहीं कर रहे हैं.
तभी वहां मौजूद लोगों में से कुछ लोग आपस में बात करने लगे "खैर हुआ तो बहुत ही बुरा लेकिन कम से कम वह नेता भी इसमें मर गया, धरती का बोझ कम हो गया".
ऊपर सभी रूहों ने उस एक रूह की तरफ देखा, अब वह सबसे नजरें चुरा रही थी.


मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on October 25, 2018 at 3:26pm

हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी। बेहतरीन कटाक्ष पूर्ण लघुकथा।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 25, 2018 at 2:31pm

 लघु-मार्गों से सस्ती लोकप्रियता या नाम कमाने वाले अवसरवादी नेताओं पर बेहतरीन कटाक्ष। हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार साहिब।

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