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गजल- इतना भी समझदार नहीं था

वज़्न 221   1221 1221 122

 

दिल लूट के’ कह दे कि खतावार नहीं था

वो इश्क में इतना भी समझदार नहीं था

 

आँखों से’ उड़ी नींद बताती है’ सभी कुछ

कैसे वो’ कहेगा कि उसे प्यार नहीं था

 

क्यों फेंक दिया उसने कबाड़े में मुझे यार

पुस्तक था’ मुहब्बत की’ मैं’ अख़बार नहीं था

 

इस देश में’ इन्साफ की’ दुनिया है निराली  

पकड़ा वो’ गया है जो’  गुनहगार नहीं था

 

जब तक थी’ गरम जेब तो’ नजदीक सभी थे

बदला जो’ समय कोई’ मददगार नहीं था  

 

परदेश का’ रुख उसने’ किया यूँ ही’ नहीं है

कोई भी’ यहाँ उसका’ खरीदार नहीं था

 

लग जाता’ गले से तो’ भुला देता’ गिले सब

मुझको भी’ मुहब्बत से’ तो’ इंकार नहीं था

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 6, 2018 at 1:06pm

आदरणीया babitagupta  जी  शुभ प्रभातम, हौसला अफजाई ले लिए आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by babitagupta on September 5, 2018 at 6:13pm

बदला जो समय कोइ मददगार नहीं था,बेहरीन पंक्ति।हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय बसंत सरजी।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 5, 2018 at 10:10am

आदरणीय विजय निकोरे जी शुभ प्रभात , आपकी हौसला अफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by vijay nikore on September 4, 2018 at 2:40pm

गज़ल अच्छी लगी। बधाई, मित्र बसंत जी

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 4, 2018 at 10:23am

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी शुभ प्रभात, दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 4, 2018 at 10:22am

आदरणीय अजय तिवारी जी शुभ प्रभातम, आपकी मनभावन प्रतिक्रिया का ह्रदय से आभार 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 4, 2018 at 10:22am

आदरणीय अजय कुमार शर्मा जी शुभ प्रभात, दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 4, 2018 at 10:21am

परम आदरणीय समर कबीर जी शुभ प्रभात , आपकी हौसलाफजाई का तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by Shyam Narain Verma on September 3, 2018 at 12:13pm

आदरणीय बसंत कुमार जी प्रणाम , बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को | सादर

Comment by Ajay Tiwari on September 3, 2018 at 9:08am

आदरणीय बसंत जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई.

 

'इस देश में’ इन्साफ की’ दुनिया है निराली  

पकड़ा वो’ गया है जो’  गुनहगार नहीं था'

ये शेर समकालीन घटनाओं पर एक अच्छी टिप्पणी है.

सादर

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