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क्षणिका - तूफ़ान ....

क्षणिका - तूफ़ान ....

शब्
सहर से
उलझ पड़ी
सबा
मुस्कुराने लगी
देख कर
चूड़ी के टुकड़ों से
झांकता
शब् की कतरनों में
उलझता
सुलझता
जज़्बात का
तूफ़ान

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 506

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 23, 2018 at 11:58am

आदरणीय   narendrasinh chauhan जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by narendrasinh chauhan on July 22, 2018 at 12:35pm
खुब सुन्दर रचना
Comment by Sushil Sarna on July 21, 2018 at 6:02pm

आदरणीय   Samar kabeerजी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 21, 2018 at 6:01pm

आदरणीय  Shyam Narain Vermaजी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on July 20, 2018 at 11:37am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,वाह बहुत ख़ूब, बहुत उम्दा क्षणिका हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Shyam Narain Verma on July 19, 2018 at 3:52pm
अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई 

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