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ग़ज़ल -नये साल में कुछ नया कर दिखायें

बह्र-फऊलुन फऊलुन फऊलुन फऊलुन

अँधेरे से निकलें उजाले में आयें।
नये साल में कुछ नया कर दिखायें।

गमों का लबादा जो ओढ़े हुये हैं,
उसे फेंक कर हम हँसें मुस्करायें।

जो चारो दिशाओं में खुशबू बिखेरे,
बगीचे में ऐसे ही पौधे लगायें।

न झगडें कभी धर्म के नाम पर हम,
किसी का कभी भी लहू ना बहायें।

न नंगा न भूखा न बेघर हो कोई,
चलो हम सभी ऐसी दुनिया बसायें।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 5:49pm

आदर्णीय लक्ष्मण धामी जी ग़ज़ल पर टिप्पणी करने एवं हौसला बढा़ने के लिये सादर आभार।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 5:45pm

आदर्णीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी सादर धन्यवाद

आदरणीय बृजेश कुमार जी आपको ग़ज़ल पसन्द आई इसके लिये हार्दिक धन्यवाद

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 4, 2018 at 12:55pm

आ. भाई राम अवध जी, सुंदर प्रेरणाप्रद गजल के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 7:56am

आदर्णीय अजय तिवारी साहब आपकी सारगर्भित टिप्पणी सचमुच मुझे उर्जावान बनाती है। आपका बहुत बहुत आभार।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 7:53am

आदर्णीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी ग़ज़ल पसन्दगी के लिये शुक्रिया। नया साल आपके एवं आपके परिवार को मंगलमय हो।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 7:51am

आदर्णीय तस्दीक़ अहमद खान साहब आपकेअमूल्य सुझाव एवं इस्लाह के लिये सादर आभार।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 7:47am

आदर्णीय समर कबीर साहब आपकेअमूल्य सुझाव के लिये बहुत शुक्रिया। 

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 7:45am

आदर्णीय अफरोज साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 4, 2018 at 7:43am

आदर्णीय मोहित मिश्रा जी ग़ज़ल सराहना के लिये बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 3, 2018 at 10:56pm

सुन्दर भावों का समावेश किया है आदरणीय ग़ज़ल में..सादर

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