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अब न कोई जंग हारा कीजिये

2122 2122 212
अब न कोई जंग हारा कीजिये ।।
अब बुलन्दी पर सितारा कीजिये ।

चाहिए गर कामयाबी इश्क़ में ।
रात दिन चेहरा निहारा कीजिये ।।

चाँद को ला दूं जमी पर आज ही ।
आप मुझको इक इशारा कीजिये ।।

बेखुदी में कह दिया होगा कभी ।
बात दिल मे मत उतारा कीजिये ।।

पालिये उम्मीद मत सरकार से ।
जो मिले उसमे गुजारा कीजिये ।।

ले लिए हैं वोट सारे आपने ।
काम भी कुछ तो हमारा कीजिये ।।

अब मुकर जाते हैं अपने, देखकर ।
अब खुदा का ही सहारा कीजिये ।।

दे रहीं हैं कुछ गवाही झुर्रियां ।
ज़ुल्फ़ इतनी मत सँवारा कीजिये ।।

गर बुढापे में जवां दिल की तलाश ।
हुस्न का भी इक नज़ारा कीजिये ।।

आपकी फितरत से भी वाकिफ हैं हम ।
शेखियाँ मत यूँ बघारा कीजिये ।।

हो गया है इश्क़ तो दिल में रहें ।
इस तरह तो मत किनारा कीजिये ।।

नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 811

Comment

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Comment by Gurpreet Singh jammu on December 1, 2017 at 3:36pm

आदरणीय नवीन मनी त्रिपाठी जी ,, बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने ,,, दिल से बधाई आपको 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 1, 2017 at 2:02pm

सुंदर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 1, 2017 at 1:50pm

सुंदर

Comment by Ramkunwar Choudhary on December 1, 2017 at 9:38am
बहुत खूब आदरणीय
Comment by Naveen Mani Tripathi on November 30, 2017 at 10:29pm
आ0 कल्पना भट्ट जी सादर आभार
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on November 29, 2017 at 9:29pm

बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय, बधाई स्वीकारें|

Comment by Naveen Mani Tripathi on November 29, 2017 at 5:25pm
भाई मनोज जी सप्रेम आभार
Comment by Naveen Mani Tripathi on November 29, 2017 at 5:23pm
शुक्रिया आ0 मनोज कुमार श्रीवास्तव जी
Comment by Manoj kumar shrivastava on November 29, 2017 at 8:22am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी, अनेक पड़ावों को सुंदर ढंग से पार करती हुइ रचना। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Naveen Mani Tripathi on November 29, 2017 at 2:26am
आ0 कबीर सर सादर नमन । हार्दिक आभार । आपकी इस्लाह किसी दिन मुझे भी कामयाब कर देगी ।

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