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ग़ज़ल (सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे लंबी रदीफ़ )

(फेलुन -फइलुन -फेलुन -फेलुन -फेलुन -फइलुन -फेलुन -फेलुन )

लल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |
छल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |

ज़ालिमकेमुक़ाबिल लब यारों मैं खोलभीदूँगाअपने मगर
बल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |

लम्हे जो गुज़ारे उल्फ़त में मुश्किल से मैं उनको भूला हूँ
पल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |

तूफ़ां से बचा कर कश्ती को लाया तो हूँ साहिल पर लेकिन
जल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |

तक़रीर फक़त मुस्तक़्बिल पर और आज पे ही होना है मगर
कल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |

मेरी बर्बाद महब्बत पर नम आँख करें अपनी लेकिन
फल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |

तस्दीक़ बता दो यह पहले कश्मीर से आने वालों को
डल का न करे कोई चर्चा वो याद मुझे आ जाएँगे |

(लल --कामना, छल --धोका , बल --हिम्मत )
(जल --पानी , फल --नतीजा ,डल --कश्मीर की झील )

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 3, 2017 at 3:52pm
मुहतरम जनाब रवि साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Ravi Shukla on November 3, 2017 at 2:52pm
आदरणीय तस्दीक साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने और यह प्रयोग भी बड़ा शानदार रहा कामयाब हुआ है जितना छोटा काफिया उतना ही लंबा रदीफ़ इस उम्दा ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 24, 2017 at 9:43pm

जनाब सलीम साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by SALIM RAZA REWA on October 24, 2017 at 12:51pm
वह वाह.. जनाब तस्दीक साहब,
ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद.
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 21, 2017 at 11:29am
जनाब ब्रजेश कुमार साहिब ,हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 21, 2017 at 11:05am
अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीय..

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