For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"कल की फोटो देखी मैंने, बहुत सुंदर दिख रही थीं आप", उसने ऑफिस में अपनी कलीग से कहा|
"अरे कल वो व्रत था ना, उसमें तो सजना बनता था", मुस्कुराते हुए वह बोली|
"अच्छा, तो आप भी यह सब मानती हैं, मुझे लगा कि आप आजाद ख्याल की हैं", उसके लहजे में व्यंग्य था या सहानुभूति, वह समझ नहीं पायी|
"ऐसी बात नहीं है, मैं तो बस परंपरा निभाने के लिए ऐसा कर लेती हूँ| वैसे इसी बहाने थोड़ी शॉपिंग भी हो जाती है, पति से गिफ्ट भी मिल जाता है", थोड़ी सफाई सी देती हुए वह बोली|
"मतलब परंपरा की आड़ में सब कुछ ठीक है, तो फिर तो आप दिन भर भूखी प्यासी भी रही होंगी", उसने एक और तंज किया|
वह थोड़ा सकपकायी और कुछ सोच के बोली "अरे फास्टिंग करने से तो स्वास्थ्य सुधरता ही है, अब एक दिन इसी बहाने से ही सही| वैसे मैं इन सबसे उम्र बढ़ने में विश्वास नहीं करती"|
"ओह, खैर आप की तक़रीर मुझे अब तक याद है जब कोर्ट का फैसला तीन तलाक के बारे में आया था, कितनी उत्साहित और खुश थीं आप नारी स्वतंत्रता को लेकर",उसने एक और सवाल किया|
"वह तो ऐतिहासिक फैसला था, आखिर कोई कब तक औरतों को पांव की जूती बना कर रखेगा", उसके आवाज में अब थोड़ी हिम्मत आ गयी|
"मतलब दूसरे मज़हब की परंपरा और संस्कार हों तो गलत और आपके हों तो ठीक", उसने पूछा|
"और कुछ महिलाएं तो उनके यहाँ भी इसे परंपरा और धर्म की दुहाई देकर सही ठहरा रही थीं, वो सही था क्या", उसके प्रश्न लगातार चुभते जा रहे थे|
"देखिये, नारी को मानसिक गुलामी ने इतना जकड रखा है कि वह अपना सही और गलत सोच ही नहीं पाती| भला इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है", उसकी आवाज फिर कमजोर सी पड़ती प्रतीत हुई|
"ओह, तो पति के उम्र के लिए भूखे प्यासे रहना मानसिक तरक्की की निशानी है? तब तो मेरी पत्नी बहुत पिछड़ी हुई है", उसके चेहरे पर मुस्कान छा गयी|
"अब यह अपनी अपनी सोच है, मैंने कहा ना कि उम्र बढ़ने में मेरा कोई विश्वास नहीं है"|
"अच्छा, कभी आपने अपने पति से कहा कि वह भी आपके लिए यूँ ही व्रत रखे, मतलब उम्र बढ़ने के लिए नहीं, बस ऐसे ही", उसने एक और सवाल किया|
वह अभी सोच ही रही थी कि उसने फिर कहा "या कभी आप के पति ने ही कहा हो कि वह आपके लिए व्रत रखेगा"|
वह सोच में पड़ गयी, ऐसा तो कभी नहीं हुआ| एक थकी निगाह से उसने सामने देखा और फींकी मुस्कराहट फेंकते हुए बोली "ऐसा तो कभी सोचा ही नहीं, ये पुरुष तो कभी महिलाओं के लिए व्रत नहीं रखते"|
"खैर आपको ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था मुझे, उस दिन नारी स्वतंत्रता पर आपके विचार सुनकर मुझे अच्छा लगा था| लेकिन कल की आपकी छुट्टी और फोटो देखकर थोड़ा अफ़सोस हुआ इसलिए मैंने ऐसा कहा, माफ़ कीजियेगा", उसने हाथ जोड़ते हुए कहा और आगे बढ़ गया|
उसने अपना फोन उठाया और कल की डाली हुई सेल्फी और बाकी फोटो डिलीट करने लगी|
मौलिक अवं अप्रकाशित 

Views: 616

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on October 12, 2017 at 10:02am

बहुत बहुत आभार आ कल्पना भट्ट जी, आपकी इस विस्तृर और उत्साह बढ़ाने वाली टिपण्णी ने उत्साह भर दिया, शुक्रिया 

Comment by विनय कुमार on October 12, 2017 at 10:01am

बहुत बहुत आभार आ मोहतरम समर कबीर साहब 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 11, 2017 at 3:45pm

बढ़िया कथा और विषय भी बहुत सुंदर लिया है आदरणीय विनय सर , सदियों से चली आ रही करवाचौथ की परंपरा अब फैशन होती जाती रही है , मेरे मायके में यह त्यौहार नहीं होता , ससुराल में होता हैं . भाभियाँ यह व्रत नहीं करती इसके मायने यह नहीं की वे अपने पति से प्यार नहीं करती कहना का तात्पर्य सिर्फ इतना है यह त्यौहार प्रेम का प्रतिक लगा है हमेशा से , गर दोनों में बीच प्यार है समर्पण की भावना है तो इस त्यौहार को सार्थक मानती हूँ वरना तो यह सिर्फ रस्म ही हैं \ बहुत ही सुंदर तरीके से आपने यहाँ इस त्यौहार को लेकर कथा गढ़ी है जिसके लिए हार्दिक बधाई |

Comment by Samar kabeer on October 11, 2017 at 11:23am
जनाब विनय कुमार जी आदाब,बहुत बढ़िया लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by विनय कुमार on October 11, 2017 at 11:01am

बहुत बहुत आभार आ मोहतरम शेख शहज़ाद साहब 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 10, 2017 at 7:02pm
समसामयिक एवं सर्वकालिक विचारोत्तेजक बढ़िया प्रस्तुति के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service