For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जनता कहती, कि सुने जनता (मदिरा सवैया) // -सौरभ

मदिरा सवैता  [भगण (२११) x ७ + गु]

 

पाँच विधानसभा फिर भंग हुई, नव रूप बुने जनता   

राज्य हुए फिर उद्यत आज नयी सरकार चुने जनता
शासन और प्रशासन हैं नतमस्तक, आज गुने जनता
तंत्र चुनाव विशिष्ट लगे.. जनता कहती, कि सुने जनता..
*********
-सौरभ

Views: 982

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 16, 2017 at 9:26pm

उत्साहवर्द्धन केलिए सादर धन्यवाद आदरणीय गोपाल नारायन जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 15, 2017 at 7:47pm

आ० सौरभ जी //// मुझे तो अंतिम पंक्ति इस प्रकार उद्वेलित कर रही है -

तंत्र चुनाव विशिष्ट लगे.. यह सौरभ बात  सुने जनता--------------सादर

Comment by Samar kabeer on February 14, 2017 at 9:58pm
इस बहुमूल्य जानकारी के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ,इस जानकारी को महफ़ूज़ कर लेता हूँ ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 14, 2017 at 9:40pm

//सवैया छन्द में ये तो जान लिया कि 211 सात बार है, अंत में क्या 12 रहेगा ? //

जी नहीं. अंत में सिर्फ़ एक गुरु रहेगा. सात भगण के बाद एक गुरु ..

२११ २११ २११ २११ २११ २११ २११ २

इसी तरह मत्तगयंद सवैया सात भगण के बाद दो गुरु के विन्यास पर होता है .. 

२११ २११ २११ २११ २११ २११ २११ २२ 

और, किरीट सवैया सात की जगह आठ भगण के विन्यास पर निबद्ध होता है 

२११ २११ २११ २११ २११ २११ २११ २११ 

Comment by Samar kabeer on February 14, 2017 at 9:04pm
उत्तर प्रदेश का हवाला देने का मक़सद सिर्फ़ इतना ही था कि आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं,वैसे इस बात का मुझे पूरा भान है कि चुनाव पुरे देश में कहीं भी हों,हालात एक जैसे ही होते हैं,सवैया बहुत उच्च कोटि का हुआ है,इस पर एक बार और दाद बनती है,पुनः बधाई स्वीकार हो ।
इस सवैया छन्द में ये तो जान लिया कि 211 सात बार है, अंत में क्या 12 रहेगा ?या कुछ और कृपया मार्गदर्शन करें,ये मुझे वागीश्वरी से आसान लग रहा है,प्रयास करना चाहता हूँ ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 14, 2017 at 8:41pm

भाई रामबली गुप्ताजी, आपसे मिला अनुमोदन उत्साहित कर रहा है. हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 14, 2017 at 8:39pm

आदरणीय समर साहब, हाँ यह सही है कि अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी पाँच विधानसभाओं में उत्तर प्रदेश की भी विधान सभा है. लेकिन यह भी सही है, कि प्रस्तुत सवैया छंद सिर्फ़ उत्तर प्रदेश की बात नहीं कर रहा. 

आपके उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 14, 2017 at 8:36pm

आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी, आपके उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 14, 2017 at 8:35pm

उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी“

Comment by रामबली गुप्ता on February 14, 2017 at 6:19pm
वाह वाह सामयिक कथ्य और भाव वो भी सवैया पद में। आनन्द आया पढ़कर। दिल से बधाई लीजिये आदरणीय।सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service