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यूँ चाँद का नकाब उतारा न कीजिये (ग़ज़ल 'राज')

२२१ २१२१ १२२१ २१२

बह्र-ए-मज़ारअ मुसम्मिन अखरब मकफूफ़

 

यूँ भीड़ में जनाब पुकारा न कीजिये

रुसवा हमें यूँ आप दुबारा न कीजिये

 

बिलकुल खुली किताब है चेहरा ये आपका

हर रोज पढ़ रहे हैं इशारा न कीजिये

 

नाराज हो न जाएँ सितारे औ आसमाँ

यूँ चाँद का नकाब उतारा न कीजिये

 

मौजे मचल रही हैं तुम्हे देख देख कर

गर पाँव चूम लें तो किनारा न कीजिये

 

गुलशन उदास होगा परेशान डालियाँ

यूँ रास्ते गुलों से सँवारा  न कीजिये 

 

अपनी हमें  न फिक्र जमाने की फिक्र है

बेवक्त इन्तजार हमारा न कीजिये

 

गुस्ताख़ दिल कहीं न भुला दे रिवायतें

जज्बात यूँ हमारे उभारा न कीजिये

--मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 15, 2017 at 9:17pm

आद० डॉ० गोपाल भाई जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई लिखना कामयाब  हुआ  तहे दिल से आभारी हूँ .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 15, 2017 at 9:16pm

आद० नरेन्द्र सिंह जी ,आपका बहुत बहुत शुक्रिया .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 15, 2017 at 8:20pm

आ० दीदी , बहुत ही उम्दा और पुरअसर गजल ,हर शेर  बेहतरीन . सादर .

Comment by narendrasinh chauhan on February 15, 2017 at 2:46pm

खूब सुन्दर रचना 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 14, 2017 at 9:15pm

आदरणीय रवि प्रभाकर जी ,ग़ज़ल पर आपकी शिरकत और दाद का दिल से स्वागत है आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत बहुत शुक्रिया आपका .

Comment by Ravi Prabhakar on February 14, 2017 at 9:10pm

बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय राजेश कुमारी जी । एक एक शे'र काबिले तारीफ़। मुबारकबाद स्‍वीकार करें ।

Comment by Ravi Prabhakar on February 14, 2017 at 9:10pm

बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय राजेश कुमारी जी । एक एक शे'र काबिले तारीफ़। मुबारकबाद स्‍वीकार करें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 14, 2017 at 5:19pm

आद० बासुदेव अग्रवाल जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपकी उत्साहित करती इस प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ सादर .

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on February 14, 2017 at 4:32pm
आ0 राजेश कुमारी जी बहुत ही सुंदर ग़ज़ल। हर अशआर लाजबाब। शेर दर शेर मुबारकवाद कुबूल कीजिए।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 13, 2017 at 7:47pm

आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी ग़ज़ल पर आपकी दाद मिली लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से आभारी हूँ .

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