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जब भी गाया तुमको गाया , तुम बिन मेरे गीत अधूरे,
तुमको ही बस ढूंढ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे,

तुमको ही अपने जीवन के नस नस में बहता ज्वार कहा,
मेरे मन की सीपी के तुम ही हो पहला प्यार कहा,
एकाकी मन के आँगन में, बरसो बन कर मेघ घनेरे,

तुमको ही बस ढूंढ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे,

तुम इन्हीं पुरानी राहों के राही हो कैसे भूल गये,
आँखों से आँखों में गढ़ना सपन सुहाने भूल गये,
तुमको ही मन गुनता रहता हर दिन, हर पल, शाम सवेरे,
तुमको ही बस ढूंढ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे,


जो पल तुम संग बीत गया, वो पल मेरे मधुमास प्रिय,
ये जो तुम बिन बीत रहा, ये पल मेरे वनवास प्रिय,
मैं मीरा सी प्रेम दीवानी, आन मिलो घनश्याम मेरे
तुमको ही बस ढूंढ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे,

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 2, 2017 at 11:29am

ऑ० अनीता जी अच्छी गीत रचना हुई है .हार्दिक बधाई . पर कई स्थानों पर ले डगमगा रही है .इस पर विचार करें .

यथा -मेरे मन की सीपी के तुम ही हो पहला प्यार कहा, इसे इस प्रकार कहें तो ले और बेहतर होगी

मेरे मन की सीपी के हो तुम ही पहला प्यार कहा,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 2, 2017 at 9:02am

आदरणीया , गीत रचना अच्छी हुई है , हार्दिक बधाइयाँ । आ. पंकज भाई की सला भी सही लगती है ।

साथ ही -- अधूरे और कोरे की तुकांतता भी बहुत सही नही है -- दूसरे दर्ज़े की तुकांता मानी जाती है ,  अगर  समान व्यंजन के पहले का स्वर मेल भी हो तो उसे उच्च तुकांतता मानते हैं -- जैसे  कोरे - मोरे , तोरे  ---- ।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 29, 2017 at 9:05pm
आदरणीय अनीता मौर्या जी मुझे भी लगा कि गीत इसी निमित्त प्रस्तुत है कि सुझाव दिए जाएं, तो लीजिये कुछ बिन्दु जिन पर और प्रयास किये जाने आवश्यक हैं प्रस्तुत हैं-
"तुमको ही अपने जीवन के नस नस में बहता ज्वार कहा,
मेरे मन की सीपी के तुम ही हो पहला प्यार कहा"-----यहाँ मेरे जीवन के नस नस में?

उचित नहीं है, इसे आप यूँ कहते तो अच्छा रहता-
मैंने तुमको ही मेरी नस नस में बहता ज्वार लिखा
अथवा- तुमको ही अपने इस तन की नस नस में बहता ज्वार लिखा

जीवन की नस नस, विज्ञान की दृष्टि से सही नहीं है, जीवन की नस नहीं होती, नस तन की होती है।।

इसके अलावा लय में कई जगह बाधा महसूस हो रही है
Comment by Anita Maurya on January 29, 2017 at 12:15pm

ये गीत समीक्षा हेतु ही प्रेषित किया है मैंने, कृपया त्रुटियां बतायें ... 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 29, 2017 at 11:19am
आदरणीय अनीता जी अच्छा प्रयास हुआ है, कुछ और मेहनत ज़रूरी है

कृपया ध्यान दे...

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