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सभी रिश्ते है मतलब के ये मानो या न मानो तुम,
है मिलते प्यार में धोखे ये मानो या न मानो तुम,
 
रहूँ मैं राम भी बनके अगर हो भरत सा भाई,
है माता कैकई घर मे ये मानो या न मानो तुम,      
 
यकीं मानो न बिगड़ेगा कभी भी गैर के कारण,
करेंगे वार बस अपने ये मानो या न मानो तुम,
 
पड़े अब आँख पर परदे नये रिश्तों के शीशे से,
हैं टूटे खून के धागे ये मानो या न मानो तुम,
 
कलेजा चीर भी दोगे नहीं कुछ मोल है "बागी"
रहा पानी न आँखों में ये मानो या न मानो तुम

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Comment

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Comment by Aditya Kumar on June 13, 2013 at 4:11pm

sundar sundar sundar bhai


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 15, 2012 at 8:32pm

आदरणीय भ्रमर जी, ग़ज़ल पर दाद हेतु बहुत बहुत आभार आपका |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 15, 2012 at 8:30pm

आदरणीय अश्वनी शर्मा जी , सराहना हेतु आभार आपका |

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 15, 2012 at 7:25pm

पड़े अब आँख पर परदे नये रिश्तों के शीशे से,

हैं टूटे खून के धागे ये मानो या न मानो तुम,
 
कलेजा चीर भी दोगे नहीं कुछ मोल है "बागी"
रहा पानी न आँखों में ये मानो या न मानो तुम
प्रिय बागी जी ..
दिखाया पक्ष कडवे सच का 
सुधरें लोग कल -देखे ये चेहरा 
देखे ये आईना 
ये कभी ना झूठ बोले ..
मानो या न मानो तुम ..
सुन्दर गजल  
बधाई 
भ्रमर ५ 
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on January 24, 2012 at 10:48pm

prabhavi gazal .....mubaraq 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 13, 2012 at 8:09pm

सराहना हेतु आभार राजीव जी 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 13, 2012 at 8:08pm

धन्यवाद अनिल तिवारी जी 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 13, 2012 at 8:08pm

सराहना हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय विछिप्त जी |

Comment by रौशन जसवाल विक्षिप्‍त on January 13, 2012 at 7:44pm

सुंदर 

Comment by Anil Tiwari on November 30, 2011 at 1:01pm

bahut sunder...

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