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मुझे याद है

जानबूझ कर वो मेरा सामान भूल जाना....
ज़ोर देकर तुमने

जिसे  कहा बार बार कि ले जाना ...
कि इसी बहाने

चोरी से तुम उसे रख दोगी...
और मुझे फिर

एक बहाना मिल जाएगा

इस तरह मुस्कुराने का....


मौलिक और अप्रकाशित।

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Comment by ASHUTOSH JHA on January 8, 2017 at 2:59am
Vijay nikore जी, बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय।
Comment by vijay nikore on January 7, 2017 at 9:55pm

 वाह ! बहुत ही सुन्दर भाव । हार्दिक बधाई।

Comment by ASHUTOSH JHA on January 7, 2017 at 1:39am
आदरणीय सुशील सरना जी हौसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया।
Comment by ASHUTOSH JHA on January 7, 2017 at 1:35am
आदरणीय महेंद्र कुमार जी आपका बहुत बहुत हार्दिक अभिनंदन।
Comment by ASHUTOSH JHA on January 7, 2017 at 1:34am
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आपका अत्यंत हार्दिक आभार।
Comment by ASHUTOSH JHA on January 7, 2017 at 1:31am
आदरणीय डॅा.आशुतोष मिश्रा जी आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by Sushil Sarna on January 6, 2017 at 4:09pm

वाह आदरणीय बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण क्षणिक का सृजन हुआ है। हार्दिक बधाई। 

Comment by Mahendra Kumar on January 6, 2017 at 3:35pm
आदरणीय आशुतोष जी, इस बढ़िया क्षणिका के लिए आपको हार्दिक बधाई। सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 6, 2017 at 2:11pm

आदरणीय आशुतोष भाई , मधुर यादों भरी क्षणिका के लिये हार्दिक बधाई ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2017 at 9:36am
इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई सादर

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